-एमसीडी चुनाव के समय बदले-बदले होंगे राजनीतिक हालात
-10 फीसदी पार्षदों को भी मुश्किल होगा बीजेपी का टिकट मिलना
हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 11 जुलाई।
आम आदमी पार्टी के बागी पार्षद भले ही बीजेपी का दामन थामने के बाद फौरी तौर पर जोश में हों, परंतु इनमें से ज्यादातर के राजनीतिक सफर पर सवालिया निशान लग गया है। सियासी जानकारों की मानें तो एक ही कार्यकाल में बार-बार पार्टी बदलने वाले इन पार्षदों में से ज्यादातर को तो आने वाले एमसीडी चुनाव में बीजेपी की ओर से टिकट मिलना ही मुश्किल हो जायेगा।
जानकारों का कहना है कि आप से निकल कर आईवीपी के रास्ते बीजेपी में शामिल होने वाले कई पार्षद तो व्यक्तिगत व्यवहार के चलते बीजेपी में अपने आपको अडजस्ट ही नहीं कर पायेंगे। दूसरी ओर 2027 में एमसीडी का यह कार्यकाल पूरा हो रहा है। यदि इसके आगे-पीछे भी चुनाव होता है तो इनमें से कई पार्षद उम्मीदवारी की दावेदारी की कसौटी पर ही फेल हो जायेंगे।
दरअसल दिल्ली नगर निगम के चुनाव हर बार ‘रोटेशन प्रणाली’ के द्वारा कराये जाते हैं। ऐसे में हर वार्ड स्थिति बदल जायेगी। जो वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे उनमें से ज्यादातर सामान्य और सामान्य की श्रेणी में से ज्यादातर वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो जायेंगे। एकसे में बीजेपी में रहते हुए इनमें से ज्यादातर को ‘वार्ड जंपिंग’ की छूट मिलना बेहद मुश्किल होगा। ऐसे में ऐसे पार्षदों के सियासी सफर वर्तमान कार्यकाल के साथ ही थम सकता है।
इंद्रप्रस्थ की सियासत के जानकारों का यह भी कहना है कि शुक्रवार को बीजेपी में शामिल होने वाले निगम पार्षद यदि चुनाव होने तक बीजेपी में टिके रहते हैं तो इनमें से ज्यादा से ज्यादा 3-4 पार्षदों को ही बीजेपी से टिकट मिल पायेगा। क्योंकि इतने पार्षदों को टिकट बंटवारे के समय अडजस्ट करना बीजेपी नेतृत्व के लिए भी आसान नहीं होगा। कारण है कि बीजेपी में पहले से ही टिकट के दावेदारों की संख्या बड़ी मात्रा में है।


