-27 विभागों में 22 मुखिया बाहर से! नियुक्ति-पदोन्नति समिति में बरसे पार्षद
-आरआर रूल्स की अनदेखी पर अधिकारियों से मांगा जवाब, सवालों की बौछार के बीच असहज दिखा निगम प्रशासन
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली, 7 अक्टूबर, 2026।
दिल्ली नगर निगम में अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर बुधवार को सिविक सेंटर में हुई नियुक्ति, पदोन्नति एवं अनुशासन समिति की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। समिति अध्यक्ष मुकेश गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में पार्षदों ने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधे सवाल दागे। सबसे बड़ा मुद्दा यह रहा कि 27 विभागों में से 22 विभागों के मुखिया बाहर से अधिकारियों को बनाया गया है। इसको लेकर पार्षदों ने कड़ी नाराजगी जताई।
बैठक में 12 में से 10 जोन उपायुक्तओं क़ी नियुक्ति के बारे में भी तीखे सवाल उठाये गए! निगम पार्षदों ने पूछा कि बिना आर आर को फॉलो किये उनकी नियुक्ति कैसे कि गई! बैठक की कार्यवाही के दौरान अधिकारीयों के द्वारा लाये गए कई प्रस्ताव या तो वापस कर दिए गए या फिर पोस्टपोंड कर दिए गए! फरबरी माह में तीन जोन उपायुक्तओं की नियुक्ति के प्रस्ताव को भी पोस्टपोंड कर दिया गया!
बैठक में सवाल उठा कि जब एमसीडी के अपने कैडर में वर्षों से काम कर रहे अधिकारी मौजूद हैं और उनके लिए पदोन्नति की निर्धारित व्यवस्था है, तो महत्वपूर्ण विभागों की कमान बाहर से आए अधिकारियों को क्यों सौंपी जा रही है? पार्षदों ने इसे निगम के कैडर अधिकारियों के हितों और पदोन्नति के अवसरों से जोड़ते हुए प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा।
आरआर रूल्स पर घिरी व्यवस्था
बैठक में Recruitment Rules (RR) के पालन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पार्षदों ने पूछा कि नियुक्ति और पदोन्नति के मामलों में निर्धारित नियमों का पालन किस स्तर पर हो रहा है और यदि नियम मौजूद हैं तो उन्हें दरकिनार कर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है। एमसीडी के आधिकारिक दस्तावेजों में विभिन्न पदों के लिए भर्ती नियम और पदोन्नति संबंधी प्रक्रियाएं निर्धारित हैं।
पार्षदों के सवालों ने अधिकारियों को कई मामलों में जवाब देने की स्थिति में ला खड़ा किया। बैठक में नियमों, पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवाल लगातार उठते रहे। इससे निगम की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
“अपने अधिकारियों को मौका क्यों नहीं?”
पार्षदों का तर्क था कि एमसीडी केवल बाहर से अधिकारियों को लाकर नहीं चल सकती। यदि निगम के अनुभवी अधिकारियों को समय पर पदोन्नति और जिम्मेदारी नहीं मिलेगी तो इसका सीधा असर कर्मचारियों के मनोबल पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि विभागाध्यक्षों की नियुक्ति में कैडर, वरिष्ठता, पात्रता और आरआर का पारदर्शी तरीके से पालन किया जाए।
बैठक में यह भी सवाल उठा कि 22 विभागों में बाहरी अधिकारियों की तैनाती की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? पार्षदों ने इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।
अब समिति की बैठक के बाद निगाह इस बात पर है कि निगम प्रशासन इन सवालों का क्या जवाब देता है और आरआर रूल्स तथा विभागाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।


