MCD: माफिया का कारनामाः अफसरों की मिलीभगत से पार्किंग में शुरू कर दिया अवैध बस अड्डा

-एमसीडी और सरकार को लगाया जा रहा हर महीने लाखों रूपये का चूना
-जेबें भरने के चक्कर में ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे MCD अधिकारी

हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 07 मई, 2026।
दिल्ली नगर निगम (MCD) में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। आए दिन जांच एजेंसियों द्वारा एमसीडी के किसी न किसी जोन आफिस या हेड क्वार्टर से भ्रष्ट अफसरों की गिरफ्तारी की जा रही हैै। फिर भी कुछ अफसरों और माफिया की मिलीभगत से एमसीडी को लाखों-करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। ताजा मामला गाजीपुर फल एवं सब्जी मंडी इलाके से एक पार्किंग साइट से अवैध रूप से बस अड्डा संचालित किये जाने का सामने आया है।

बता दें कि ‘इन फ्रंट आफ सेंट्रल वेयर हाउस पार्किंग, गाजीपुर’ पार्किंग साइट को एमसीडी के लाभकारी परियोजना विभाग (RP Cell) के द्वारा लोगों की गाड़ियां खड़ी करने के लिए करीब 15 लाख रूपये के मासिक लाइसेंस फीस पर पांच वर्षों के लिए मै. एम.एस.कांट्रेक्टर को दिया गया है। लेकिन ठेकेदार ने अफसरों की मिलीभगत से बिना किसी सरकारी अनुमति के सारे कायदे-कानूनों को धता बताते हुए इस पार्किंग साइट को कई हिस्सों में स्थायी रूप से बांटकर अलग अलग कंपनियों/ लोगों को ‘सब-लेट’ कर दिया है। इससे ठेकेदार को तो हर महीने लाखों रूपये की अतिरिक्त अवैध कमाई हो रही है, परंतु एमसीडी को आर्थिक घाटा उठाना पड़ रहा है।
पार्किंग माफिया ने इस पार्किंग साइट का एक बड़ा हिस्सा बस सेवा उपलब्ध कराने वाली एक निजी कंपनी को दे दिया है। इस कंपनी ने पार्किंग साइट के एक हिस्से में बाकायदा अपना स्थायी बुकिंग आफिस बनाया हुआ है। जिसमें दिल्ली से बाहर विभिन्न स्थानों को जाने वाले यात्रियों की बुकिंग की जाती है। खास बात है कि बस कंपनी इसी जगह से अपनी बसों का संचालन (यात्रियों को बसों में चढ़ाने और उतारने) का काम करती है। जबकि सरकार की ओर से इस तरह का निजी बस अड्डा संचालित करने का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी है, परंतु अपनी जेबें भरने के चलते अफसरों के द्वारा ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
एमसीडी अफसरों की चुप्पी!
इस मामले में निगम आयुक्त श्री संजीव खिरवार एवं अतिरिक्त आयुक्त श्री सतेंद्र सिंह दुरसावत इस मामले में एमसीडी का पक्ष मांगा गया। परंतु एमसीडी के आला अधिकारियों ने इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। हालांकि एडीसी आरपी सेल श्री संजय सिंह ने कहा कि ‘मैंने अभी दो-तीन दिन पहले ही चार्ज संभाला है। मैं भी कार्यप्रणाली को समझ रहा हूं। इस मामले में आपसे जानकारी मिली है, अतः इसके बारे में पता करके समुचित कार्रवाई की जायेगी।’