-‘सह कार्यालय मंत्री’ के सियासी पद को बना दिया ’सेलरीड वर्कर’
-सवा साल बाद भी नहीं कर पाये जिलों का गठन
हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 28 मई, 2026।
दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल अन्य पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के मुकाबले ज्यादा बड़े विवादों से भरा रहा। 2022 में हुए नगर निगम चुनावों के तुरंत बाद पूर्व अध्यक्ष आदेश गुप्ता को हटाकर 11 दिसंबर 2022 को सचदेवा को दिल्ली बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। इसके पश्चात 23 मार्च 2023 को दिल्ली बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने की विधिवत घोषणा की गई थी।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही वीरेंद्र सचदेवा के ऊपर सबसे पहले आरोप ‘घमंडी’ हो जाने के लगे थे। जोकि उनका कार्यकाल पूरा होने तक लगातार लगते रहे। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष पद, युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद और सह कार्यालय मंत्री के संगठनात्क पद को ‘सेलरीड पोस्ट’ बनाने जैसे विवाद ज्यादा चर्चा में रहे।
‘सेलरीड पोस्ट’ बना दी सह कार्यालय मंत्री की कुर्सी!
दिल्ली बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वीरेंद्र सचदेवा ने सबसे पहले कार्यालय मंत्री पद से हुकुम सिंह की छुट्टी करके बृजेश राय को कार्यालय मंत्री और अमित गुप्ता को सह कार्यालय मंत्री बनाया था। खास बात है कि अमित गुप्ता पुरानी दिल्ली के जिला अध्यक्ष के कार्यकाल के समय से वीरेंद्र सचदेवा के साथी रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वीरेंद्र सचदेवा के द्वारा ही दिल्ली बीजेपी के इतिहास में पहली बार सह कार्यालय मंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति को सेलरी देना शुरू किया गया। गौरतलब है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता भी कुछ समय के लिए दिल्ली बीजेपी कार्यालय में सह कार्यालय मंत्री रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि अमित गुप्ता को 30 हजार रूपये की मासिक सेलरी दी जा रही है। यह वही अमित गुप्ता हैं, जिन्होंने दिल्ली गेट वार्ड में स्थित नेहरू हिल पार्क में चल रहे अवैध बकरा बाजार की शिकायत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की थी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एमसीडी ने इस पार्क की बुकिंग को रद्द कर दिया था। परंतु इसके बावजूद स्थानीय विधायक की छत्रछाया में इस पार्क के पीछे के हिस्से में वह अवैध बकरा बाजार ईद से पूर्व तक बदस्तूर चलता रहा। जिसकी वजह से दिल्ली बीजेपी की जमकर किरकिरी हुई।
पूर्वांचल मोर्चा का अध्यक्ष पद का विवाद!
दूसरा सबसे बड़ा विवाद पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष पद को लेकर रहा। वीरेंद्र सचदेवा ने मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा के समय पहले नीरज तिवारी को युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया था। लेकिन कुछ समय पश्चात ही शायद ‘भूल सुधार’ करते हुए संतोष ओझा को पूर्वांचल मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया और नीरज तिवारी को दिल्ली बीजेपी का प्रवक्ता घोषित किया गया। पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष पद पर नियुक्तियों को लेकर पार्टी में कई तरह की चर्चाएं चलीं।
युवा मोर्चा का अध्यक्ष पद पर भी करना पड़ा था बदलाव
वीरेंद्र सचदेवा ने पहले शशि यादव को दिल्ली बीजेपी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया था। परंतु कुछ समय पश्चात ही पार्टी को शायद ‘भूल सुधार’ करना पड़ा और त्यागी को युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाना पड़ा। इसके साथ ही निगम पार्षद शशि यादव को पहले पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया और बाद में फिर से पार्टी में शामिल करना पड़ा।
सवा साल में भी कर पोय जिलों का गठन
वीरेंद्र सचदेवा ऐसे प्रदेश अध्यक्ष रहे जो अपने कार्यकाल में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करने के बाद सवा साल तक सभी 14 जिलों का गठन तक नहीं करा सके। इसको लेकर पूर्व जिला अध्यक्षों में भारी नाराजगी बनी रही। बता दें कि वीरेंद्र सचदेवा ने 2025 के विधानसभा चुनावों से पूर्व जिला अध्यक्षों में बदलाव किया था। खास बात रही कि इनमें से कुछ लोग तो वही थे, जिन्हें निगम चुनाव के मौके पर जिला अध्यक्ष पद से हटाया गया था और बाद में उन्हें ही जिलों का अध्यक्ष बना दिया गया। लेकिन नये जिला अध्यक्ष बनाने के बाद अपने पूरे कार्यकाल में वीरेंद्र सचदेवा सभी 14 जिलों में अन्य पदाधिकारियों की नियुक्तियां नहीं करा सके। इसको लेकर पार्टी में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा कि जब पुराने जिला पदाधिकारियों से ही काम चलाना था तो फिर जिला अध्यक्षों को ही क्यों बदला गया?


