‘नगरकोट धाम’ जहां गिरा था माता सती का बांया स्तन

-हिमांचल प्रदेश के कांगड़ा में करें बज्रेश्वरी माता के दर्शन

हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ कांगड़ाः 07 जून।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा शहर में स्थित बज्रेश्वरी माता मंदिर भारत की 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने उनके रौद्र रूप को शांत करने के लिए सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के टुकड़े कर दिए थे। मान्यता के अनुसार, यहाँ माता सती का बायाँ स्तन गिरा था। इसलिए इस स्थान को असीम आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र माना जाता है। इस स्थान को ‘नगरकोट धाम’ और काँगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर अपनी महिमा और चमत्कारों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
वज्रेश्वरी देवी को देवी दुर्गा, देवी पार्वती और आदि-माया का रूप माना जाता है। उन्हें मुख्य रूप से शक्ति और वज्र (बिजली) की देवी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर प्रांगण में अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। जिनमें से माता तारा देवी का मंदिर उस समय भी अडिग रहा था जब 1905 में काँगड़ा इलाके में भयंकर भूकंप में सब कुछ तहस नहस हो गया था। इस मंदिर की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 733 मीटर (2,404 फीट) है।
कांगड़ा पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के साथ ही रेल मार्ग का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। हालांकि ज्यादातर श्रद्धालु और पर्यटक अपने वाहनों से यानी कि सड़क मार्ग का रास्ता ही अपनाते हैं।