-दिल्लीवालों की जान से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो: अंकुश नारंग
एसएस ब्यूरो/नई दिल्ली, 03 जून 2026!
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने बुधवार को निगमायुक्त को पत्र लिखकर साकेत बिल्डिंग हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और पूरे दिल्ली में जर्जर व अवैध इमारतों का सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि साकेत भवन हादसा कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि भाजपा शासित एमसीडी के भ्रष्टाचार, लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
अंकुश नारंग ने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों और अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद साकेत मामले में कार्रवाई नहीं की गई, जिसका खामियाजा निर्दाेष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों की जान से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
बुधवार को एमसीडी कमिश्नर को लिखे पत्र में अंकुश नारंग ने कहा है कि मैं विपक्ष की ओर से साकेत में हुए दुर्भाग्यपूर्ण इमारत हादसे पर गहरी चिंता जाहिर करता हूं। इस घटना में न सिर्फ जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, बल्कि कई लोग घायल हुए हैं और पीड़ित परिवारों को गहरा आघात पहुंचा है। इस तरह के हादसे बिल्डिंग नियमों के पालन, उन्हें लागू करने वाली व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
अंकुश नारंग ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि इमारत ढहने के असल कारणों का पता लगाने के लिए तुरंत एक निष्पक्ष और गहन जांच बिठाई जाए। इसके साथ ही, उस इलाके में निर्माण कार्यों की देखरेख करने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों या अन्य संबंधित लोगों की लापरवाही को भी उजागर किया जाए। उन्होंने कहा कि एमसीडी को दिल्लीवालों की जान लेने का कोई हक नहीं है, लेकिन एमसीडी के कुछ अधिकारी अपने मामूली निजी स्वार्थ के लिए दिल्ली के लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं और उन्हें हर रोज मौत के जोखिम में डाल रहे हैं।
अंकुश नारंग ने एमसीडी कमिश्नर से मांग की कि इस पूरी घटना की तत्काल और व्यापक जांच के आदेश दिए जाएं। पास किए गए बिल्डिंग प्लान, निर्माण की अनुमति और संबंधित विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण के सभी रिकॉर्ड सख्ती से खंगाले जाएं। जो भी अधिकारी या व्यक्ति इस मामले में लापरवाह या मिलीभगत का दोषी पाया जाए, उसकी जिम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत और आर्थिक मदद भी दी जाए।
अंकुश नारंग ने आगे कहा कि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए एमसीडी के दायरे में आने वाली बाकी सभी असुरक्षित, अवैध या जर्जर इमारतों का सर्वे कराया जाए और जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं और जो भी कार्रवाई हो, उसकी एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सदन के पटल पर रखी जाए। आम नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। सिस्टम में जनता का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एमसीडी कमिश्नर इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जरूरी कदम उठाएंगे।


