-जूनियर (अंडर-20) हैंडबॉल टीम को विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए खुद जुटाने पड़े लाखों रुपये।
विजय कुमार / नई दिल्ली, 22 जून!
उनका सपना था भारत का प्रतिनिधित्व करना और अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल महासंघ (IHF) की महिला जूनियर (अंडर-20) विश्व चैंपियनशिप जैसे सबसे बड़े मंच पर खेलना। कोच सचिन चौधरी के नेतृत्व में 12 सदस्यीय भारतीय टीम 24 जून से 5 जुलाई तक चीन के जिनझोंग में आयोजित जूनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी।
लेकिन अपने करियर की सबसे बड़ी प्रतियोगिता की तैयारी करने के बजाय इन खिलाड़ियों को अपने-अपने राज्य संघों के माध्यम से तीन लाख रुपये जमा कराने के लिए कहा गया, ताकि यात्रा, आवास और अन्य खर्च पूरे किए जा सकें।
भारत के लिए खेलने का सपना पूरा करने के लिए इन युवा खिलाड़ियों को परिवार और दोस्तों से उधार लेना पड़ा। इसकी वजह रही सरकारी उदासीनता और हैंडबॉल प्रशासन में लंबे समय से चल रहा विवाद, जिसके चलते हैंडबॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मान्यता समाप्त हो गई।
खेल मंत्रालय से इस प्रतियोगिता के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलने के कारण को खिलाड़ियों से धन जुटाने के लिए कहना पड़ा।
कानपुर की खिलाड़ी सौम्या श्रीवास्तव के पिता सप्ताह में दो बार लिवर डायलिसिस से गुजरते हैं। उनकी बहन के भारत के लिए खेलने के सपने को पूरा करने के लिए उनके भाई ने रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लिया।
सौम्या ने कहा, “हमें कर्ज लेना पड़ा। हमारे परिवार के लिए यह बहुत कठिन समय है, लेकिन जब सरकार हमारे महासंघ को मान्यता नहीं देती तो हमारे पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था।”
उनके पास बैठी हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर की खिलाड़ी कनिष्का ने भी इसी तरह की कहानी सुनाई। उनके पिता सुशील कुमार वन विभाग में गार्ड हैं।
कनिष्का ने कहा, “हमें भी उधार लेना पड़ा। जिन खिलाड़ियों के परिवार तीन लाख रुपये की व्यवस्था कर सके, वे चीन जा रही हैं। कई प्रतिभाशाली लड़कियां सिर्फ इसलिए टीम के साथ नहीं जा सकीं क्योंकि वे इतनी बड़ी राशि नहीं जुटा पाईं।”
टीम की कप्तान रिद्धिमा, जो बिलासपुर की ही हैं और लेफ्ट विंग पोजीशन पर खेलती हैं, का कहना है कि तैयारियां भी विश्व स्तर की प्रतियोगिता के अनुरूप नहीं हो सकीं। उन्होंने बताया, “हमारा सिर्फ एक सप्ताह का आउटडोर प्रशिक्षण शिविर चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित डीएवी स्कूल में लगा था, जबकि विश्व चैंपियनशिप इंडोर कोर्ट पर खेली जाएगी। हमने सीमित संसाधनों में जितनी तैयारी संभव थी, की। टीम और कोचों ने संयोजन और रणनीति पर काम किया। अब हमारा लक्ष्य मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।”
रिद्धिमा के पिता सुरेश कुमार, जो एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं, ने भी अपनी बेटी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तीन लाख रुपये जमा किए।
हैंडबॉल फेडरेशन के महासचिव डॉ. तेजराज सिंह का कहना है कि संगठन आर्थिक रूप से खिलाड़ियों की मदद करने की स्थिति में नहीं था। उन्होंने कहा, “यही भारतीय खेल प्राधिकरण इन खिलाड़ियों के लिए एक महीने का प्रशिक्षण शिविर चला चुका है और क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के लिए भी सहायता दे चुका है। लेकिन अब जबकि टीम विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर चुकी है, किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं दी गई।”
फेडरेशन के कार्यकारी निदेशक आनंदेश्वर पांडे ने भी सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल महासंघ के अध्यक्ष डॉ. हसन मुस्तफा ने दो बार भारतीय ओलंपिकसघ को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि भारत में हैंडबॉल इंडिया मान्यता प्राप्त संस्था है। यहां तक कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के चार्टर की भी याद दिलाई गई, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय ओलंपिक समिति को उसी राष्ट्रीय महासंघ को मान्यता देनी चाहिए जिसे अंतरराष्ट्रीय महासंघ की मान्यता प्राप्त हो। इसके बावजूद इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।”
इस बीच, भारतीय टीम की युवा खिलाड़ी तमाम मुश्किलों के बावजूद विश्व चैंपियनशिप में देश का नाम रोशन करने के इरादे से चीन रवाना होने की तैयारी कर रही हैं।


