72 हजार… पर भारी चौकीदार

-देश में फिर एक बार… भाजपा सरकार
-परंपरागत सीट से हारे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी
-303 सीट लेकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंची भाजपा

हीरेन्द्र सिंह/ नई दिल्ली
केंद्र में एक बार फिर प्रचंड बहुमत से भाजपा सरकार आई है। भाजपा के चौकीदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंधी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का न्याय और 72 हजार के वादों का किला ढह गया। आष्चर्य की बात तो यह रही कि कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट अमेठी को भी नहीं बचा पाई। अपने रोड षो और पदयात्राओं के जरिए भीड़ जुटाने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का जादू किसी काम नहीं आया। बड़नगर के बाहुबली के सामने समूचा विपक्ष पानी मांगता नजर आया। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अजीत सिंह, मायावती, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद यादव, ममता बनर्जी, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू बगलें झांकते नजर आए।
कांग्रेस नहीं खोल सकी खाता
भाजपा ने 542 में से 303 सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। आष्चर्य की बात यह रही कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस देश के कई राज्यों में अपना खाता तक नहीं खोल सकी। कांग्रेस को 52 सीट पर ही जीत हासिल हुई। लेकिन पार्टी दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मुबई, उत्तराखंड, हरियाणा सहित कई राज्यों में अपना एक भी उम्मीदवार नहीं जिता पाई।
यूपी में छाए योगी, नहीं चला प्रियंका का जादूः
उत्तर प्रदेश में भाजपा व सहयोगी दलों ने 80 में से 62 सीट पर जीत हासिल की है। उपचुनाव में लोकसभा सीट गंवाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार अपनी कर्मस्थली से भोजपुरी फिल्मों के स्टार रविकिशन को सांसद चुनवाकर भेजा है। राज्य में मिली इस प्रचंड जीत के लिए योगी आदित्यनाथ का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित देश भर में तूफानी दौरे करते हुए प्रचार में हिस्सा लिया।
दूसरी ओर राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी को सियासी मैदान में उतारने के दांव का कांग्रेस को कोई फायदा नहीं मिला। 2014 में दो सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस 2019 में केवल एक ही सीट पर जीत हासिल कर सकी। रायबरेली सीट से पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। जबकि प्रियंका गांधी के तूफानी प्रचार के बावजूद राहुल गांधी अपनी अमेठी सीट को नहीं बचा सके।
ताश के पत्तों की तरह ढहे पूर्व पीएम-सीएम के सियासी महलः
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्र्रेस के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन उनके सियासी महत ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।

पूर्व प्रधानमंत्रीः एच डी देवगौड़ा
पूर्व प्रधानमंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी देवगौड़ा पीएम मोदी की लहर में अपनी सीट नहीं बचा सके। कर्नाटक की टुमकुर सीट से चुनाव लड़ रहे देवगौड़ा को भारतीय जनता पार्टी के जीएस बसवाराज ने कड़ी टक्कर देते हुए शिकस्त दी।
पूर्व मुख्यमंत्रीः शीला दीक्षित
तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित भी लोकसभा चुनाव में अपनी सीट नहीं बचा पाईं। शीला दीक्षित को दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट पर भाजपा के मनोज तिवारी ने तीन लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया। षीला दीक्षित को कांग्रेस ने एन वक्त पर चुनाव में उतारा था और उन्हें इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मोदी लहर के आगे शीला दीक्षित नहीं टिक पाईं।
पूर्व मुख्यमंत्रीः भूपेंद्र सिंह हुड्डा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा भी मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा पाए। भाजपा ने हरियाणा में क्लीन स्वीप किया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने गढ़ रोहतक सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें भाजपा के अरविंद कुमार शर्मा ने हराया। बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2005 से 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रीः दिग्विजय सिंह
कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को मोदी लहर राजनीति से दोबारा सन्यास लेने पर मजबूर कर दिया। भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह को भाजपा की साध्वी प्रज्ञा सिंह ने 3 लाख से ज्यादा मतों से हराया। बता दें कि दिग्विजय सिंह एक बार नहीं बल्कि दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। लेकिन इस बार वह अपनी सीट बचाने में नाकामयाब रहे।
पूर्व मुख्यमंत्रीः बाबूलाल मरांडी
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी भी इन चुनावों में अपनी सीट हार गए। झारखंड विकास मोर्चा के बाबूलाल चार बार सांसद रहे हैं। लेकिन इस बार भाजपा की अन्नपूर्णा देवी से उन्हें कड़ी टक्कर मिली। मरांडी को करीब चार लाख मतों से हार का मुंह देखना पड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्रीः हरीश रावत
कांग्रेस के हरीश रावत भी इस बार मोदी लहर के आगे पस्त हो गए। 2014 से 2017 तक उतराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत को भारतीय जनता पार्टी के अजय भट्ट ने षिकस्त दी है। अजय भट्ट ने 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराया।

पूर्व मुख्यमंत्रीः अशोक च्वहाण
कांग्रेस के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक च्वहाण भी इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके। अशोक च्वहाण की गिनती कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती है और वह महाराष्ट्र में खास प्रभाव रखते हैं। लेकिन 2019 के लोकसभाचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्रीः सुशील कुमार शिंदे
पूर्व केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे इस बार लोकसभा चुनावों में अपनी सीट नहीं बचा सके। महाराष्ट्र की सोलापुर सीट से चुनाव लड़ रहे सुशील कुमार शिंदे को भाजपा के डॉक्टर जय सिद्धेश्वर ने पछाड़ा है।

पूर्व मुख्यमंत्रीः मुकुल संगमा
मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता मुकुल संगमा भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। मुकुल संगमा मेघालय की तुरा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें एनडीए गठबंधन में षामिल नेशनल पीपुल्स पार्टी के अगथा संगमा ने हराया है। अगथा संगमा इस सीट पर करीब 6 लाख मतों से जीत दर्ज की।
पूर्व मुख्यमंत्रीः नवाम टुकी
कांग्रेस के नेता और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नवाम टुकी इस बार हार गए हैं। नवाम टुकी को भाजपा के किरेण रिजिजू ने शिकस्त दी है। किरेन रिजिजू ने करीब एक लाख वोट से अपनी जीत दर्ज की है।

पूर्व मुख्यमंत्रीः वीरप्पा मोइली
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता वीरप्पा मोइली को भी मोदी लहर की सुनामी में हार का सामना करना पड़ा है। वह कर्नाटक की चिकबलपुर सीट से चुनाव लड़े हैं। उन्हें इस सीट पर भाजपा के बीएन बचे गौड़ा ने भारी अंतर से मात दी।

 

लोकसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों को मिली सीट
आम आदमी पार्टी – 1
एजेएसयू पार्टी – 1
एआईएडीएमके – 1
एआईएमआईएम – 2
तुणमूल कांग्रेस – 22
एआईडीएफ – 1
बहुजन समाज पार्टी – 10
भारतीय जनता पार्टी – 303
बीजू जनता दल- 12
सीपीआई- 2
सीपीआईएम – 3
डीएमके – 23
कांग्रेस – 52
मुस्लिम लीग – 3
जेएंडके नेशनल कांफ्रेंस – 3
जनता दल सेक्यूलर – 1
जनता दल यूनाइटेड – 16
झारखंड मुक्ति मोर्चा – 1
केरला कांग्रेस एम- 1
लोक जनशक्ति पार्टी – 6
मिजो नेशनल फ्रंट – 1
नागा पीपुल्स फ्रंट – 1
नेशनल पीपुल्स पार्टी – 1
एनसीपी – 5
एनडीपीपी – 1
आरएसपी – 1
समाजवादी पार्टी – 5
शिरोमणि अकाली दल – 2
शिवसेना – 18
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा – 1
टीएसआर – 9
तेलगू देशम – 3
वाई एसआर कांग्रेस – 22
अन्य – 8
कुल योग – 542