दिल्ली BJP को नये अध्यक्ष का इंतजार… आधा दर्जन नामों की कतार!

-सबसे बड़ा सवालः बनिया-पंजाबी के फेर से फिर निकलेगी बीजेपी?
-दिल्ली बीजेपी के ज्यादातर नेता चाहते हैं प्रदेश नेतृत्व में बदलाव
!

हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 09 जनवरी, 2026।
दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को नया अध्यक्ष मिलने का इंतजार जल्दी खत्म हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इसके लिए जोड़-तोड़ में जुटे हुए हैं और दिल्ली बीजेपी के करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व के बारे में जल्दी ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में अभी कोई भी कुछ ठोस जानकारी दे पाने में समर्थ नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक पंजाबी बिरादरी में से विधायक राज कुमार भाटिया और राजीव बब्बर के नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ज्यादा चर्चा में हैं। परंतु पिछले कुछ दिनों से कंद्रीय मंत्री हर्ष मलहोत्रा का नाम भी इस सूची में शामिल हो गया है। वहीं बनिया बिरादरी से वर्तमान प्रदेश महामंत्री विष्णू मित्तल का नाम ज्यादा चर्चा में है। वहीं बनिया और पंजाबी से बाहर की बात करें तो ओबीसी वर्ग से विधायक गजेंद्र यादव और पूर्व महापौर जय प्रकाश के नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में हैं।
इन सबसे हटकर कुछ और नाम भी खासी चर्चा में हैं। जिनमें अनुसूचित जाति वर्ग से पार्टी सांसद योगेंद्र चंदोलिया का नाम संभावित प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सबसे आगे है। वहीं, अन्य प्रमुख लोगों में विधायक अनिल शर्मा और सतीश उपाध्याय एवं नकुल भारद्वाज के नाम जोर शोर से चर्चा में हैं। पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि ‘क्योंकि दिल्ली की मुख्यमंत्री वर्तमान में रेखा गुप्ता हैं, अतः पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद वैश्व वर्ग के नेता को मिल पाना कुछ मुश्किल हो सकता है। वहीं एक और नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद सरकार में है और प्रदेश अध्यक्ष का पद पार्टी में होता है, जो कि दोनों अलग अलग बातें हैं।
दूसरी ओर पार्टी का एक धड़े की ओर से दिल्ली बीजेपी को पंजाबी वर्ग से नया अध्यक्ष दिये जाने पर भी सवालिया निशान लगाये जा रहे हैं। इस धड़े के लोगों का कहना है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पंजाबी बिरादरी से आते हैं, अतः एक बार फिर से पंजाबी बिरादरी के ही नेता को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बैठाया जाना कहां तक सही होगा? वहीं पार्टी के दूसरे धड़े के नेताओं का यह कहना है कि बीजेपी को दिल्ली में ‘बनिया-पंजाबी’ से बाहर निकलना होगा और अन्य वर्गों के नेताओं की क्षमताओं का उपयोग करना होगा। इस धड़े का मानना है कि दिल्ली में बहुत ज्यादा जातिवाद नहीं चलता है और दिल्ली विधानसभा चुनाव में 2025 में मिली जीत बनिया-पंजाबी वाद की वजह से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम पर मिली है। दिल्ली विधानसभा चुनाव की जीत में जितना योगदान दिल्ली बीजेपी की क्षमताओं का था, उससे ज्यादा योगदान आम आदमी पार्टी की अक्षमताओं का रहा है।
हालांकि, कुछ गिने-चुने लोगों का कहना है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को फिर से कार्यकाल का विस्तार दिया, (रिपीट) किया जा सकता है। परंतु पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि दिल्ली बीजेपी में कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी भी एक व्यक्ति को लागातार दूसरी बार भी प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया हो। उनका कहना है कि कई पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को कुछ अंतराल के बाद दोबारा यह मौका जरूर दिया गया है। इस तरह से दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने वालों में केदार नाथ साहनी, मदन लाल खुराना, ओम प्रकाश कोहली और डॉक्टर हर्षवर्धन के नाम शामिल हैं।
निगम चुनाव में दो सीट गंवाई
सूत्रों ने बताया कि हाल ही में 12 सीटों पर हुए दिल्ली नगर निगम के उपचुनाव में दिल्ली बीजेपी ने पहले के मुकाबले दो सीटें कम पाई थीं। जबकि कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर एक सीट पर कब्जा कर दिया था और आम आदमी पार्टी को भी कोई नुकसान नहीं हुआ था। एमसीडी उपचुनाव में हुआ दो सीटों का नुकसान पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के खिलाफ जा रहा है।
ज्यादा चर्चाओं में नारायणा वार्ड की हार!
एमसीडी उपचुनाव में बीजेपी को नारायणा वार्ड से मिली हार बहुत ज्यादा चर्चा में है। दिल्ली बीजेपी ने यह सीट 148 वोट से गंवाई थी। खास बात है कि दिल्ली बीजेपी ने डॉ चंद्रकांता शिवानी को नारायणा वार्ड से चुनाव में उतारा था। इससे पहले वह आम आदमी पार्टी में थीं और 2025 से पहले दिल्ली विधानसभा के लिए हुए राजेंद्र नगर सीट पर उपचुनाव में चंद्रकांता ने बीजेपी उम्मीदवार का जबरदस्त विरोध किया था और काले झंडे दिखाये थे। केवल इतना ही नहीं, हाल ही में हुए एमसीडी उपचुनाव हारने के बाद उन्होंने दिल्ली बीजेपी दफ्तर के बाहर रो-रोकर अपना दुखड़ा बयान किया था और पार्टी के कई नेताओं के ऊपर आरोप लगाये थे। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच तो चुनाव में टिकट दिये जाने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।