धरोहरों को संभालने में नाकाम रेखा सरकार.. लोगों से की अपने हाथों में लेने की पुकार!

-दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को 5 साल के लिए गोद ले सकेंगे निजी संस्थान
-स्मारकों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए सरकार से मिलेगा 2 करोड़ तक का अनुदान

हीरेंद्र सिंह राठौड़/ नई दिल्ली, 30 जून 2026।
सालाना अरबों रूपये खर्च करने के बावजूद दिल्ली सरकार राजधानी की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का सही ढंग से संरक्षण नहीं कर पा रही है। सरकारी अफसरशाही की अकर्मण्यता, लापरवाही एवं भ्रष्टाचार की वजह से इन धरोहरों का लगातार क्षय हो रहा है और बद से बदतर हालत में पहुंचती जा रही हैं। पिछले दिनों मिर्जा गालिब की हवेली में बकरे बांधे जाने की खबरें इसका उदाहरण हैं। केवल इतना ही नहीं, कई दूसरी धरोहरों की तो इससे भी ज्यादा बुरी स्थिति है।
ऐसे में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, विकास और संवर्धन के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है। दोनों योजनाएं मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूर कर दी है। इन योजनाओं के माध्यम से दिल्ली सरकार पहली बार सरकारी, निजी और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से दिल्ली के स्थानीय महत्व के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और विकास का अभियान शुरू करेगी। दिल्ली सरकार ‘हमारे स्मारक, हमारा गौरव’ योजना के अंतर्गत ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ शुरू कर रही है, ताकि निजी संस्थाएं और नागरिक इस अभियान का हिस्सा बन सकें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार का पुरातत्व विभाग ‘दिल्ली प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम (डीएएचएमएएकआर), 2004’ के अंतर्गत दिल्ली के स्थानीय महत्व वाले उन ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और विकास का दायित्व निभाता है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ के अंतर्गत सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), निजी कंपनियां, पंजीकृत एनजीओ, ट्रस्ट, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से दिल्ली सरकार के ऐतिहासिक स्मारकों को गोद ले सकेंगे। ऐसे सहयोगी ‘स्मारक मित्र’ कहलाएंगे। वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में 75 ऐतिहासिक स्मारक हैं। इस योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ संबंधित स्मारक पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड जैसी पर्यटक सुविधाओं के विकास, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च स्वयं वहन करेंगे। इसके तहत प्रत्येक गोद लिए गए स्मारक पर दिल्ली सरकार को औसतन लगभग 4.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की बचत होगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर स्मारक मित्र किसी स्वीकृत कार्यक्रम या आयोजन से कोई आय अर्जित करते हैं तो उस राशि का उपयोग केवल संबंधित स्मारक के रखरखाव और विकास पर ही किया जाएगा। उस आय को निजी लाभ के रूप में अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी। स्मारक अभिग्रहण की अवधि पांच वर्ष होगी। इसके लिए दिल्ली सरकार, संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी और स्मारक मित्र के बीच त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी तथा नियमित निगरानी, समय-समय पर समीक्षा और हितधारकों एवं पर्यटकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर योजना का मूल्यांकन किया जाएगा। इच्छुक संस्थाओं और व्यक्तियों को ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) प्रस्तुत करना होगा और प्रत्येक स्मारक के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट देना होगा, जिसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, आवश्यक सुविधाओं और रखरखाव में दिए जाने वाले योगदान का विस्तृत विवरण होगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ का उद्देश्य अलग-अलग है। स्मारक अभिग्रहण योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ अपने संसाधनों से स्मारकों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड और अन्य पर्यटक सुविधाओं के विकास और रखरखाव का कार्य करेंगे। वहीं ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ के तहत सरकार पात्र एवं विशेषज्ञ संस्थाओं को स्मारकों के मूल संरक्षण, जीर्णोद्धार और अन्य तकनीकी संरक्षण कार्यों के लिए 2 करोड़ रूपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन 75 स्मारकों में से 21 स्मारकों का मूल संरक्षण दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) द्वारा कराया जा रहा है।