महापौर प्रवेश वाही ने 8 MRS मशीनों को MCD के बेड़े में किया शामिल

-स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन जय भगवान यादव और आईवीपी नेता मुकेश गोयल रहे मौजूद

एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली, 19 मई 2026।
दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने मंगलवार को दिल्ली नगर निगम मुख्यालय, डॉ. एस.पी.एम. सिविक सेंटर, नई दिल्ली से 8 ट्रक-माउंटेड मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (MRS) मशीनों को हरी झंडी दिखाकर निगम के बेड़े में शामिल किया। इस अवसर पर उप-महापौर मोनिका पंत, स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन, जय भगवान यादव, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के नेता मुकेश गोयल, एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार तथा निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में दिल्ली नगर निगम राष्ट्रीय राजधानी में स्वच्छता व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ एवं आधुनिक बना रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पहल के अंतर्गत दिल्ली नगर निगम ने 8 अतिरिक्त मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद की है।
महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि वर्तमान बेड़े में वृद्धि करने का उद्देश्य दिल्ली में विशेष रूप से 60 फीट या उससे अधिक राइट ऑफ वे वाली सड़कों पर यांत्रिक सड़क सफाई के दायरे और आवृत्ति को बढ़ाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ये आधुनिक मशीनें दिल्ली की सड़कों पर धूल प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में उल्लेखनीय योगदान देंगी।
प्रवेश वाही ने आगे कहा कि ये मशीनें स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा को भी बेहतर बनाएंगी, क्योंकि व्यस्त एवं तेज यातायात वाले मार्गों तथा केंद्रीय विभाजकों पर मैनुअल सफाई की आवश्यकता कम होगी, जहां तेज रफ्तार यातायात गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। उन्होंने जानकारी दी कि इन मशीनों का संचालन व्यापक संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा, ताकि इनके कुशल संचालन, नियमित रखरखाव एवं सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके।
तकनीकी एवं खरीद संबंधी विवरण साझा करते हुए महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि इन वाहनों की गुणवत्ता जांच आईआईटी दिल्ली द्वारा सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक वाहन की प्रति इकाई लागत 58.69 लाख रुपये है तथा इन मशीनों की अनुमानित उपयोगी परिचालन आयु 10 वर्ष निर्धारित की गई है।