फिल्म स्टार विजय की एंट्री ने बदला तमिलनाडु का सियासी खेल!

-शशिकला ने नई पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

एसएस ब्यूरो/ चेन्नईः 6 मार्च
इसी साल तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन को मजबूत कर लिया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) अंदरूनी संकटों से जूझ रहा है। इसी बीच, दक्षिण के फिल्म स्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है। इन हालातों में तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है।
चुनाव से पहले देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) ने भी डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में शामिल होने का फैसला किया। डीएमडीके का यह कदम विपक्षी खेमे के लिए झटका माना जा रहा है। यह पार्टी इससे पहले कई बार विपक्षी गठबंधनों के साथ रही है और कुछ क्षेत्रों में उसका सीमित लेकिन प्रभावी जनाधार माना जाता है। डीएमडीके के साथ आने से डीएमके की सियासी ताकत और बढ़ सकती है।
AIADMK में असंतोष से ढीली पड़ रही सियासी पकड़
दूसरी ओर, एआईएडीएमके लगातार राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रही है। पार्टी के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व पर पार्टी के अंदरखाने में असंतोष है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम का डीएमके के साथ जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी वी के शशिकला ने नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ध्यान देने वाली बात है कि लगातार तीन चुनाव हारने के बाद पहले से दबाव में चल रही एआईएडीएमके के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक चुनौती को और बढ़ा सकते हैं।
नकारी नहीं जा सकती विजय की लोकप्रियता
तमिल फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, पार्टी अभी पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा रही, लेकिन विजय की लोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया, शहरी युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। हाल में उन्हें कुछ निजी विवादों और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच रही है। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। विजय की नई पार्टी तीसरी ताकत बनने की कोशिश कर रही है। डीएमके मजबूत संगठन के साथ है, जबकि एआईएडीएमके आंतरिक विवादों से जूझ रही है। ऐसे में विजय की पार्टी वोटों के बंटवारे में असर डाल सकती है।