-खेल मंत्री और आयोग को लिखा पत्र
विजय कुमार/ नई दिल्लीः 19 जून।
मशहूर टेबल टैनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने फेडरेशन में चयन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाये हैं। दरअसल टेबल टेनिस फेडरेशन आॅफ इंडिया ने गुरूवार को ही 20वीं एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय दल में शमिल खिलाड़ियों के नामों की घोषणा की थी। 18 जून को फेडरेशन की ओर से जारी खिलाड़ियों की सूची में मनिका बत्रा का नाम नहीं था। इसके पश्चात मनिका बत्रा ने फेडरेशन की चयन प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
मनिका बत्रा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘लगभग दो दशकों से मैंने अपना जीवन भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए समर्पित किया है। हर पदक, हर उपलब्धि और हर मील का पत्थर भारतीय जर्सी पहनकर हासिल किया गया है। मैंने कभी किसी विशेष व्यवहार की मांग नहीं की। मेरी केवल यही अपेक्षा रही है कि सभी खिलाड़ियों पर समान नियम और मानक एक समान रूप से लागू किए जाएं। एशियाई खेल 2026 की टीम से मेरा बाहर किया जाना बेहद निराशाजनक है, केवल परिणाम के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी कि चयन मानदंडों की व्याख्या और उनके अनुप्रयोग का तरीका सवाल खड़े करता है। मुझे अब तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
मैं माननीय खेल मंत्री और भारतीय ओलंपिक संघ के नेतृत्व से विनम्र अनुरोध करती हूं कि वे इस मामले की जांच करें। ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी, सुसंगत और सभी खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष बनी रहे। मैं पूरी स्पष्टता और जवाबदेही चाहती हूं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सर्वोच्च स्तर पर चयन संबंधी निर्णय किस आधार पर लिए गए।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चयन प्रक्रिया विश्व रैंकिंग, राष्ट्रीय रैंकिंग और चयन समिति के विवेकाधिकार के संयोजन पर आधारित मानी जाती है। यदि वास्तव में ऐसा है, तो पारदर्शिता की मांग है कि प्रत्येक घटक और उसके उपयोग को संबंधित खिलाड़ियों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा जाए।
मैं यह भी उल्लेख करना चाहती हूं कि पिछले एशियाई खेलों के चयन चक्र में ऐसे खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया गया था जो विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 से बाहर और राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष 10 से बाहर थे। उन्हें विशेष विचार और विशेष सुविधाएं भी प्रदान की गई थीं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि वर्तमान चयन प्रक्रिया स्पष्ट करे कि वही या समान सिद्धांत मेरे मामले में क्यों लागू नहीं किए गए।
विश्व रैंकिंग के संदर्भ में, मैं वर्तमान में विश्व नंबर 51 हूं और हाल ही में बहुत मामूली अंतर से शीर्ष 50 से बाहर हुई हूं। यह अंतर बेहद कम है और मैं अब भी उस श्रेणी के बहुत निकट हूं। मैं किसी बहुत दूर की रैंकिंग पर नहीं हूंय बल्कि ऐसी स्थिति में हूं जहां एक ही रैंकिंग चक्र में ऊपर या नीचे जाना संभव है। ऐसे में यह समझना कठिन है कि केवल यही कारक मेरे लंबे समय के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन से अधिक निर्णायक कैसे हो सकता है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग अंक एक रोलिंग प्रणाली पर आधारित होते हैं, जिसमें पुराने अंक समय के साथ हट जाते हैं और नए अंक जुड़ते हैं। इसलिए रैंकिंग हमेशा किसी खिलाड़ी की वर्तमान क्षमता और प्रदर्शन की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती। यदि रैंकिंग को चयन का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि रैंकिंग में बदलाव हाल का है या लंबे समय से बना हुआ है।
इस सत्र में मैंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और कई मजबूत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हराया है, जिनमें चीन के अंडर-19 युवा चैंपियन और एशिया के अन्य शीर्ष खिलाड़ी शामिल हैं। मेरा वर्तमान प्रदर्शन उच्च अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतरता को दर्शाता है।
यदि चयन का मुख्य आधार रैंकिंग और आंकड़े हैं, तो यह भी स्वीकार किया जाना चाहिए कि प्रतिस्पर्धी चक्र के दौरान सभी खिलाड़ियों की रैंकिंग में उतार-चढ़ाव होता रहता है और कम समय में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।
राष्ट्रीय रैंकिंग के संदर्भ में, मुझे ज्ञात है कि घरेलू प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन को भी चयन चर्चा का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की बढ़ती संख्या और वैश्विक स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा की मांग के कारण हर घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेना हमेशा संभव नहीं होता। अपने पूरे करियर में मेरा ध्यान लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पर रहा है, इसलिए राष्ट्रीय रैंकिंग को इन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि अलग-थलग।
अपने करियर में मैंने 2018 एशियाई खेलों में मिश्रित युगल का कांस्य पदक, एशियन कप में महिला एकल का कांस्य पदक और कई राष्ट्रमंडल खेल पदक जीते हैं। मैं ओलंपिक एकल स्पर्धा के राउंड ऑफ 16 तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी और एशियाई खेलों के एकल क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी (पुरुष या महिला) भी रही हूं। ये उपलब्धियां भारत के खेल इतिहास का हिस्सा हैं और किसी भी चयन प्रक्रिया में इन्हें पारदर्शी और सुसंगत रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।
मेरी प्रमुख चिंता चयन मानकों के समान अनुप्रयोग को लेकर है। यदि चयन प्रक्रिया में विवेकाधिकार का कोई भी हिस्सा शामिल है, तो उसके उपयोग का तरीका पारदर्शी, समान और स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। इसके अनुप्रयोग में किसी भी प्रकार का अंतर स्वाभाविक रूप से निष्पक्षता और समान व्यवहार पर प्रश्न उठाता है।
मैंने औपचारिक रूप से अपने चयन न होने के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें निर्णय का पूरा आधार, लागू नियम, चयन मानदंड और मेरे मामले में प्रत्येक कारक को दिए गए महत्व का विवरण शामिल हो। मुझे उम्मीद है कि मुझे दस्तावेजी मानदंडों पर आधारित स्पष्ट, संरचित और तथ्यात्मक उत्तर प्राप्त होगा।
यह वक्तव्य किसी व्यक्तिगत शिकायत या विशेष रियायत की मांग नहीं है। यह पारदर्शिता, निरंतरता और चयन मानकों के समान अनुप्रयोग की बात है। खिलाड़ी अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित करते हैं और वे ऐसी प्रक्रिया के हकदार हैं जो स्पष्ट, दस्तावेजीकृत और समान रूप से लागू हो।
मैं भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं और अपने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देती रहूंगी। साथ ही मेरा मानना है कि खेलों में चयन प्रक्रियाएं पारदर्शी, जवाबदेह और किसी भी संदेह से परे होनी चाहिए।


