-यह स्टोरी मीडिया से बातचीत पर आधारित है ऑस्ट्रेलिया महिला टीम की खिलाड़ियों और कप्तान से टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद
विजय कुमार/ इंग्लैंड लॉर्ड्स, 6 जुलाई।
अपने पहले ही टूर्नामेंट में कप्तान के रूप में सोफी मोलिन्यू ने ऑस्ट्रेलिया को आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का खिताब दिलाया। मोलिन्यू ने पूरे टूर्नामेंट में 11 विकेट लेकर संयुक्त रूप से दूसरे सबसे सफल गेंदबाज का स्थान हासिल किया। कप्तानी की शुरुआत में चोट के कारण उन्हें कई मुकाबलों से बाहर रहना पड़ा था।
ऑस्ट्रेलिया की नई कप्तान सोफी मोलिन्यू स्वीकार करती हैं कि जब उन्हें एलिसा हीली की जगह कप्तान बनाया गया, तब उन्हें खुद भी इस जिम्मेदारी को निभाने को लेकर संदेह था। लेकिन अब, लॉर्ड्स में लगभग 30,000 दर्शकों के सामने ऑस्ट्रेलिया को आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का खिताब दिलाने के बाद यह साफ हो गया है कि उन्होंने इस चुनौती को शानदार ढंग से पार कर लिया। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आठवें वर्ष में 28 वर्षीय ऑलराउंडर को 2026 की शुरुआत में हीली के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कप्तान नियुक्त किया गया था।
हालांकि, कप्तानी संभालने के तुरंत बाद पीठ की चोट के कारण वह फरवरी में भारत के खिलाफ बहु-प्रारूप (मल्टी-फॉर्मेट) श्रृंखला के अंतिम मुकाबलों से बाहर हो गईं। इसके बाद मार्च में वेस्टइंडीज दौरे पर भी उनकी भागीदारी सीमित रही। उनकी चोटों के इतिहास को देखते हुए चयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने यहां तक कहा था कि कप्तानी के फैसले पर दोबारा विचार किया जा सकता है। लेकिन मोलिन्यू ने शानदार वापसी करते हुए कप्तान और गेंदबाज दोनों भूमिकाओं में टीम को विश्व चैंपियन बनाया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इन सभी संदेहों को गलत साबित करने की संतुष्टि है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘हां।’ उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का सबसे शानदार दिन है। लॉर्ड्स में करीब 30 हजार दर्शकों के सामने विश्व कप जीतना बेहद खास एहसास है। कप्तानी की शुरुआत थोड़ी अस्त-व्यस्त रही। कुछ मैचों में कप्तानी की और फिर चोटिल हो गई। ईमानदारी से कहूं तो मेरे मन में भी कुछ संदेह थे और बाहर भी लोग सवाल उठा रहे थे। लेकिन मैंने अपने सफर में यही सीखा है कि खुद पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है। मैं बेहद खुशकिस्मत हूं कि लोगों ने मुझ पर भरोसा किया। मुझे इस टीम पर हमेशा पूरा विश्वास रहा है और यही सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए यह सफलता बेहद संतोष देने वाली है।’
‘जब कप्तान बनने के तुरंत बाद ही चोट के कारण शुरुआती मुकाबले नहीं खेल सकी, तब लगा था कि शायद यह जिम्मेदारी निभा नहीं पाऊंगी। लेकिन पिछले छह महीनों ही नहीं, बल्कि पिछले दस वर्षों से ऑस्ट्रेलियाई टीम में मुझे जो समर्थन मिला है, उसके लिए मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हूं।’
फाइनल में मोलिन्यू के चार ओवर में 32 रन देकर एक विकेट के आंकड़े उनके वास्तविक प्रभाव को पूरी तरह नहीं दर्शाते। ऑस्ट्रेलिया ने पहले गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड को 20 ओवर में चार विकेट पर 150 रन तक सीमित रखा। नैट साइवर-ब्रंट (नाबाद 58) और फ्रेया केम्प (नाबाद 44) ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए बेथ मूनी (64) और फोएबी लिचफील्ड (48) ने पहले विकेट के लिए 100 रन जोड़कर जीत की नींव रखी और ऑस्ट्रेलिया ने सात विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। मूनी को फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच और पूरे टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। बड़ी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करना उनकी पहचान बन चुका है।
मोलिन्यू ने उनकी जमकर प्रशंसा करते हुए कहा,
‘मून्स (बेथ मूनी) कमाल की खिलाड़ी हैं। वह फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों के लिए बनी हैं। उनकी निरंतरता अद्भुत है और पिछले कुछ महीनों में उनका खेल और भी बेहतर हुआ है। वह पूरी आजादी के साथ बल्लेबाजी करती हैं, लेकिन साथ ही शायद वह सबसे समझदार क्रिकेटर हैं जिनके साथ मैंने खेला है। उन्हें परिस्थितियों को पढ़ना और जरूरत के हिसाब से पारी को आगे बढ़ाना बखूबी आता है। आज भी उन्होंने जरूरत पड़ने पर आक्रामक शॉट खेले और बेहतरीन बल्लेबाजी की।’
ष्वह हमारी टीम की एक महत्वपूर्ण लीडर हैं। जब वह बोलती हैं तो पूरी टीम ध्यान से सुनती है। बल्लेबाजी क्रम की वह रीढ़ हैं और आज विकेटकीपिंग में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।’


