-शिव लिंग की पूजा से पूरी होतीं मनोकामना, रात के समय यहां रूकने से बचते हैं सैलानी
-जिन पत्थरों से बनाया मंदिर, वह कोसों दूर तक नहीं हैं उपलब्ध
एसएस ब्यूरो/ मुरैनाः 08 मार्च, 2026।
भारत में ऐसे हजारों स्थान हैं, जिनके साथ अनोखी कहानियां जु़ड़ी हुई हैं। ऐसा ही एक मंदिर है काकनमठ मंदिर। जो कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है। गुर्जर प्रतिहार शैली मे निर्मित कई अनोखे प्राचीन मंदिर स्थित है। जिनमें बटेश्वर मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर और काकनमठ मंदिर हैं, तीनो मंदिर कुछ मील की दूरी के अंतर में स्थित हैं। काकनमठ मंदिर का निर्माण गुर्जर प्रतिहार शासको ने 9वी से 10वी सदी मे किया। गुर्जर प्रतिहार शैली में बना यह मंदिर 115 फीट ऊंचा है। बताया जाता है कि काकनमठ मंदिर ने कई युध्दां को झेला है। करीब 1 हजार साल पुराना काकनमठ, मुरैना जिले के सिहोनिया से लगभग 3 किलोमीटर दूर बावड़ीपुरा गांव में स्थित है। मंदिर में मौजूद मूर्तियां काफी पुरानी हैं, ज्यादातर टूटी हुई हैं, जिन्हें माना जाता है कि पहले के कई शासकों ने नुकसान पहुंचाया था। कई अवशेष आज ग्वालियर के म्यूजियम में रखे हुए हैं।
बिना चिपकाए पत्थरों से खड़ा किया पूरा मंदिर
काकनमठ मंदिर के बारे में सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर का निर्माण ऐसे पत्थरों से किया गया है जो कि यहां से कोसों दूर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही मंदिर के निर्माण में प्रयोग किये गये पत्थरों को सीमेंट, चूना या अन्य किसी वस्तु से चिपकाए बिना ही एक दूसरे के ऊपर रखा गया है। आश्चर्य की बात है कि बड़े बड़े भूकंप और प्राकृतिक घटनाओं के बावजूद यह मंदिर हजारों वर्षों से खड़ा है।


कछवाहा वंश के शासकों ने कराया निर्माण
एतिहासिक उल्लखों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में कछवाहा वंश के राजा कीर्ति राज ने करवाया था। कहा जाता है कि रानी ककनावती भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं, इसलिए मंदिर का नाम उनके नाम पर रखा गया। मौसम और समय की मार से कुछ हिस्से नष्ट हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते रहते हैं।
मिले हुए अभिलेखों से पता चलता है कि सुहोनिया, जिसे अब सिहोनिया के नाम से जाना जाता है, लगभग 11वीं शताब्दी में स्थापित कछवाहा साम्राज्य के कुशवाहा शासकों की राजधानी थी। कछवाहा शासकों में से एक, कीर्तिराज ने 1015 से 1035 ईस्वी के बीच सिहोनिया में इस “शिव मंदिर“ का निर्माण करवाया था। यह मंदिर “काकन मठ मंदिर“ के नाम से प्रसिद्ध है और अपनी अद्भुत मूर्तिकला के लिए जाना जाता है, हालांकि अब यह खंडहर अवस्था में है। कहा जाता है कि इस मंदिर में प्रार्थना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस मंदिर की समग्र संरचना पिरामिडों से काफी मिलती-जुलती है।
एक रात में भूतों ने बनाया मंदिर
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में भूतों ने किया था। भूतों ने मिलकर मंदिर बनाना शुरू किया और जैसे ही सुबह हुई, उन्हें निर्माण बीच में ही छोड़ना पड़ा, इसलिए मंदिर आज भी अधूरा सा दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे भूतों का मंदिर भी कहा जाता है। यह कहानी रोमांचित करती है कि भोर के समय में किसी महिला ने आटा पीसने की चक्की चला दी थी, जिसकी वजह से भूत अधूरा निर्माण छोड़कर चले गये थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय मंदिर से अजीब भूतिया आवाजें आती हैं। जिसकी वजह से बाहर से आने वाले सैलानी इस मंदिर के परिसर में रात के समय रूकना पसंद नहीं करते हैं।
विदेशी शासकों ने मुर्तियां खंडित कराईं
स्थानीय लोगों में एक कहानी यह भी प्रचलित है कि विदेशी मुस्लिम शासकों ने अपने शासन काल में इस मंदिर की मुर्तियों को खंडित करा दिया था।
विभिन्न स्थानों से मंदिर की दूरी
शानदार काकनमठ मोरेना बस स्टैंड से 34 किमी दूर है ( आगरा या धौलपुर से आते समय मोरेना चौराहे से बाएँ मुड़ें) और ग्वालियर से आते समय मितावली शिव मंदिर से 23 किमी दूर है (ग्वालियर बस स्टैंड से भिंड रोड होते हुए 57 किमी)। हवाई मार्ग से आने के लिए निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर हवाई अड्डा है जो मुरैना से लगभग 30 किलोमीटर, भिंड से लगभग 80 किलोमीटर और श्योपुर जिले से लगभग 210 किलोमीटर दूर स्थित है।
ट्रेन द्वारा आने के लिए मुरैना या भिंड जिले के रेलवे स्टेशन हैं और श्योपुर को संकीर्ण गेज के माध्यम से मुरैना और ग्वालियर से जोड़ा गया है। सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए पर्यटक स्वयं या किराए के वाहन ले सकते हैं क्योंकि सभी पर्यटन स्थल सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।


