-दाम बढ़ने की आशंकाओं के बीच सरकार ने घटाए पेट्रोल डीजल के दाम
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली।
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते देशभर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एडीशनल एक्साइज ड्यूटी) में भारी कटौती की है। जारी आदेश के अनुसार पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर उत्पाद शुल्क पहले के 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0 (शून्य) रुपये कर दिया गया है। हालांकि आम उपभोक्ताओं को एक्साइज ड्यूटी मे कटौती का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है।
यह कटौती अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग और उसके कारण तेहरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर लगाई गई नाकाबंदी के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच की गई है। होर्मुज जलमार्ग विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग है। युद्ध से पहले वैश्विक समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा यानी डेली 20 से 25 मिलियन बैरल कच्चा तेल और लगभग 10 अरब घन फुट गैस इसी मार्ग से भेजी जाती थी।
इसके साथ ही मोदी सरकार ने पहली बार एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है। नए नियमों के तहत एटीएफ पर 50 रूपये प्रति लीटर टैक्स तय किया गया था, लेकिन छूट के बाद प्रभावी दर 29.5 रूपये प्रति लीटर हो गई है। इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ने की संभावना है, जिसका असर यात्रियों के टिकट किराए पर पड़ सकता है।
घरेलू तेल कंपनियों को मिली राहत
सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स शून्य रखा है, जबकि डीजल पर 18.5 रूपये प्रति लीटर की दर तय की गई है। निर्यात के लिए पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर कई शुल्कों से छूट दी गई है। इसके अलावा 2022 में लागू विंडफॉल टैक्स को भी खत्म कर दिया गया है, जिससे घरेलू तेल कंपनियों को राहत मिलेगी। ये सभी बदलाव 26 मार्च 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
आम उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा कटौती का लाभ!
मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद अब बड़ा सवाल है कि क्या दोनों की कीमतें भी कम होगी? आम उपभोक्ताओं के लिए यह खबर उतनी राहत भरी नहीं लग रही है, जितनी कि दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आने की संभावना कम है।
इसका मुख्य कारण तेल कंपनियों को हो रहा भारी घाटा बताया जा रहा है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इस कारण भारतीय तेल कंपनियां हर लीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर करीब 48.8 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। सरकार की ओर से दी गई 10 रुपये की राहत से कंपनियां अपने घाटे को कम कर सकेंगी।


