-आप के एक बागी निगम पार्षद ने वापस लिया डिप्टी मेयर पर से अपना नामांकन
हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 22 अप्रैल।
दिल्ली के मेयर चुनाव (Mayor Elections) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को पार्टी के एक बागी निगम पार्षद ने डिप्टी मेयर (Deputy Mayor) पद से अपना नामांकन वापस ले लिया। परंतु दूसरे बागी निगम पार्षद विजय कुमार (Vijay Kumar) आप नेताओं की पहुंच से दूरी बनाये हुए हैं। जिसके चलते मेयर चुनाव में आप की विजय पर फिलहाल प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। पार्टी में चर्चा शुरू हो गई है कि यदि विजय कुमार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया तो अधिकृत उम्मीदार रविंद्र भारद्वाज (Ravinder Bhardwaj) को अपना नामांकन वापस लेना पड़ सकता है।
बता दें कि आम आदमी पार्टी के दो निगम पार्षदों ने डिप्टी मेयर के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ अपने नामांकन पत्र दाखिल किये थे। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी में चल रहा अंदरूनी घमासान खुलकर सबके सामने आ गया था। इसके बाद से ही पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने बागी पार्षदों को काबू करने में जुट गये थे। इसके पश्चात 19 अप्रैल को बागी निगम पार्षद ने अपने एक्स हेंडल से खुद के ऊपर आप नेताओं द्वारा दबाव बनाये जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी में अब लोकतंत्र नहीं बचा है और वह डिप्टी मेयर का चुनाव जीतकर दिखाएंगे।
इसके पश्चात सोमवार को पार्टी नेताओं के दबाव में आप पार्षद नरेंद्र गिरसा ने डिप्टी मेयर पद से अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया। आप के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी नेतृत्व की मनमानी की वजह से आप पार्षदों और दूसरे नेताओं में भारी नाराजगी है। यदि विजय कुमार डिप्टी मेयर पद पर चुनाव लड़ने के लिए अड़े रहते हैं तो इसका असर मेयर पद के चुनाव पर भी पड़ सकता है। फिलहाल विजय कुमार आप नेताओं की पहुंच से दूर बताये जा रहे है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पार्षदों में इसी तरह की नाराजगी चलती रही तो नगर निगम में सत्ता का परिवर्तन हो सकता है।
बीजेपी को हो रहा कमजोर नेतृत्व का आभास
एक ओर आप पार्षदों में घमासान मचा हुआ है, दूसरी ओर दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी लगातार कमजोर साबित हो रही है। निगम में विपक्ष के नेता राजा इकबाल सिंह सत्ताधारी आप में चल रहे अंदरूनी टकराव का कोई राजनीतिक फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कमजोन नेतृत्व की वजह से पार्टी निगम में बेहद कमजोर साबित हो रही है। बीजेपी को अपने प्रतिद्वंदी दल की कमजोरी का फायदा उठाना चाहिए था, परंतु अभी तक इसकी कोई कार्ययोजना ही नहीं बन पाई है। यहां तक कि एक-एक बात प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से समझानी पड़ती है, फिर भी संतोषजनक नतीजे नहीं मिल पा रहे है।


