-नगर निगम का हाउस टैक्स का दायरा बढ़ाने पर जोर
-ज्यादा से ज्यादा प्रॉपर्टीज को दायरे में लाने की कवायद
हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 22 अगस्त, 2022।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे दिल्ली नगर निगम की नजर दिल्ली वालों की प्रॉपर्टीज पर गढ़ गई है। नगर निगम दिल्ली वालों की जेब से ज्यादा से ज्यादा संपत्ति कर निकालना चाहता है। इसके लिए निगम अधिकारियों ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिये हैं। पहले पूरी दिल्ली में संपत्ति कर की दरें समान करने के नाम पर उत्तरी व पूर्वी दिलली वालों के लिए दरों में बढ़ोतरी की गई, और अब दूसरी तरह के जुगाड़ भिड़ाये जा रहे हैं। निगम अधिकारियों की कोशिश 25 लाख संपत्तियों में से ज्यादा से ज्यादा संपत्तियों को संपत्ति कर के दायरे में लाने की है।
बता दें कि यदि आपने किरायेदारी की डीड रजिस्टर कराई है तो आपको ज्यादा हाउस टैक्स चुकाना पड़ सकता है। नगर निगम के संपत्ति कर विभाग ने हर जोन में ऐसी संपत्तियों की पहचान का काम शुरू कर दिया है। दिल्ली नगर निगम के एक आला अधिकारी के मुताबिक किराये पर दी गई संपत्तियों से ज्यादा संपत्ति कर वसूला जाता है। लेकिन संपत्तियों के मालिक नगर निगम को इसकी सूचना नहीं देते हैं और या तो वह संपत्ति कर ही जमा नहीं कराते और कराते हैं भी तो सामान्य दरों पर ही टैक्स जमा कराते हैं।
अब हर जोन के स्तर पर ऐसी संपत्तियों की पहचान की जा रही है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तरों पर काम चल रहा है। निगम अधिकारियों की नजर ऐसे लोगों पर है जो किरायेदारी की डीड रजिस्टर करवाते हैं। निगम अधिकारी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों और इससे संबंधित वेबसाइट्स से इस तरह की सूचना एकत्र कर रहे हैं, ताकि ऐसी संपत्तियों को संपत्ति कर के दायरे में लाकर ज्यादा से ज्यादा संपत्ति कर वसूला जा सके।
अनियमित कालोनियों की संपत्तियां हैं सबसे बड़ी चुनौती
बता दें कि दिल्ली नगर निगम के संपत्ति कर विभाग के सामने अनियमित कालोनियां सबसे ज्यादा बड़ी चुनौती हैं। इन कालोनियों में 20 लाख से ज्यादा ऐसी संपत्तियां हैं, जिनसे नगर निगम को कोई संपत्ति कर प्राप्त नहीं होता। लेकिन इन संपत्तियों में ज्यादातर 20 से 100 वर्ग गज तक के मकान हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या 50-60 गज या फिर इससे भी कम माप वाले मकानों की है। इनमें से ज्यादातर संपत्तियां निचली श्रेणी में आती हैं, जहां से बहुत ज्यादा संपत्ति कर प्राप्त होने की उम्मीद भी नहीं है। अतः निगम अधिकारी ऐसी कालोनियों की व्यावसायिक संपत्तियों का पता लगाने में जुट गये हैं, ताकि इनसे ज्यादा से ज्यादा संपत्ति कर वसूला जा सके।