-11 अक्टूबर कों होगा वेदांता हाफ मैराथन का आयोजन
विजय कुमार/ नई दिल्ली: 05 अक्टूबर।
11 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित होने जा रही वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 में 25 पेससेटर धावकों की टीम इसके प्रतिभागियों को उनके रेस-डे लक्ष्य तक पहुंचने में मार्गदर्शन करेगी। इस टीम में सीएक्सओ, सरकारी अधिकारी, उद्यमी और देशभर के अनुभवी धावक शामिल हैं।
पेससेटर एक अनुभवी धावक होता है, जो निर्धारित गति बनाए रखते हुए धावकों के एक समूह, जिसे ‘बस’ कहा जाता है, को तय समय में रेस पूरी करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, सब-2:30 बस के साथ दौड़ने वाला धावक 2 घंटे 25 मिनट से 2 घंटे 29 मिनट के बीच रेस पूरी करने की उम्मीद कर सकता है।
इस वर्ष हाफ मैराथन में 17 पेससेटर 1:50 से 2:40 तक के समय की बसों का नेतृत्व करेंगे। इनमें प्रमुख संस्थानों के सीएक्सओ और वरिष्ठ पेशेवर शामिल हैं। वहीं 10 किलोमीटर दौड़ में आठ महिला पेससेटरों की टीम होगी, जो 55 से 88 मिनट तक की बसों का नेतृत्व करेगी।
25 पेससेटरों में से 11 दिल्ली-एनसीआर से बाहर के हैं। इनमें बेंगलुरु, कोलकाता, मुंबई, दार्जिलिंग, जम्मू और झारखंड के धावक शामिल हैं। टीम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी हैं, जिनमें आयकर विभाग के संयुक्त आयुक्त, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव और रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (वित्त) रजत अग्रवाल शामिल हैं।
पेससेटरों के दल में लंबा अनुभव रखने वाले धावक भी शामिल हैं। दीपक शर्मा वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में 16वीं बार हिस्सा लेंगे। गणेश अनंतनारायणन 13 संस्करणों का अनुभव रखते हैं और उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 1 घंटा 48 मिनट है। संजय छाबड़ा लगातार 12वीं बार दिल्ली हाफ मैराथन में दौड़ेंगे।
होसुर रनर्स क्लब की संस्थापक और डिलीवरी हेड थांदेस्वरन पेरियासामी सितंबर 2018 से लगातार 2,850 से अधिक दिनों से दौड़ रहे हैं और अब तक 22,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं। लगातार दिनों तक दौड़ने के लिए उनके नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। उन्होंने 2025 में वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन की 2:30 बस का नेतृत्व किया था।
एसबीआई क्रेडिट कार्ड की मुख्य वित्तीय अधिकारी और अल्ट्रा-मैराथन धावक रश्मि मोहंती ने नवंबर 2010 में दिल्ली हाफ मैराथन में अपनी पहली हाफ मैराथन दौड़ी थी। 15 संस्करण पूरे करने पर उन्हें 2025 में सम्मानित किया गया था। उनका कहना है, “इस रेस में हिस्सा लेना उन तरीकों में से एक है, जिससे मैं अपनी निरंतरता बनाए रखती हूं।” पेससेटर बनने के बारे में उन्होंने कहा, “जिस समुदाय ने पूरे सफर में हमारा साथ दिया है, उसे कुछ वापस देना भी जरूरी है।”
10 किलोमीटर दौड़ में बेंगलुरु की प्रैक्टिसिंग नेत्र रोग विशेषज्ञ और फैकल्टी सदस्य डॉ. चिन्मयी जे. त्रिशूलमूर्ति भी पेससेटर की भूमिका निभाएंगी। वह प्रशिक्षित सर्च, ट्रीट एंड रेस्क्यू पर्वतारोही हैं और 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह कर चुकी हैं। 2017 से दौड़ रही डॉ. चिन्मयी ने 2019 में पर्वतारोहण शुरू किया था। वह पहली बार पेससेटर बनेंगी और दिल्ली में अपनी पहली रेस भी दौड़ेंगी।
उन्होंने कहा, “मैं कम दौड़ती हूं, लेकिन मुझे दौड़ना बहुत पसंद है और पेससेटर बनने को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं।” एवरेस्ट अभियान के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें काफी सहनशक्ति की जरूरत होती है, क्योंकि पूरा अभियान करीब 50 से 55 दिनों का होता है और एवरेस्ट का शिखर अभियान के अंतिम सप्ताह में ही आता है।
पहली बार दौड़ने वाले प्रतिभागियों को डॉ. चिन्मयी की सलाह है, “गति की चिंता न करें; जिस रफ्तार से दौड़ सकते हैं, उसी में रेस का आनंद लें।”
वहीं रश्मि मोहंती धावकों को रेस के दिन पूरी तरह तरोताजा होकर पहुंचने की सलाह देती हैं। उनके शब्दों में, “मैं चाहूंगी कि आप थोड़ा कम प्रशिक्षण लेकर भी मजबूत स्थिति में स्टार्ट लाइन पर पहुंचें।”


