मजनूं का टीला से सलीम गढ़ फोर्ट तक एलिवेटेड रिंग रोड को मंजूरी

-खत्म होगा कश्मीरी गेट इलाके का जाम

एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली की यातायात व्यवस्था को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली रेखा गुप्ता सरकार ने एलिवेटेड रिंग रोड परियोजना के पहले कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना शहर की प्रमुख सड़कों पर लंबे समय से बनी जाम की समस्या को कम करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई है। कुल छह चरणों में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट के तहत फेज-1ए को मंजूरी दी गई है। यह फेज करीब 5 किलोमीटर लंबा होगा, जो मजनूं का टीला से सलीमगढ़ फोर्ट के बीच बनाया जाएगा। प्रस्तावित एलिवेटेड रिंग रोड की कुल लंबाई 57.5 किलोमीटर होगी।
सूत्रों के अनुसार, इस कॉरिडोर को प्राथमिकता इसलिए दी गई है क्योंकि इस हिस्से में यातायात दबाव सबसे अधिक है और तकनीकी दृष्टि से इसका निर्माण अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना गया है। परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट (पीपीआर) पहले ही तैयार की जा चुकी है। डीपीआर अगले दो महीनों में पूरी होने की संभावना है, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
छह कॉरिडोर हैं प्रस्तावित
दिल्ली सरकार के पास फिलहाल 6 ऐसे कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। आजादपुर चौक से मेटकाफ हाउस जंक्शन (7 किमी), सलीमगढ़ फोर्ट से डीएनडी फ्लाईओवर (11.5 किमी), डीएनडी फ्लाईओवर से मोती बाग मेट्रो स्टेशन (10.5 किमी), मोती बाग मेट्रो स्टेशन से राजौरी गार्डन (10 किमी), राजौरी गार्डन से आजादपुर चौक (13.5 किमी)। हालांकि, फिलहाल केवल फेज-1ए पर ही काम शुरू करने की मंजूरी दी गई है।
कश्मीरी गेट इलाके को जाम से मिलेगी राहत
अधिकारियों के मुताबिक, यह कॉरिडोर आंशिक रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग के दायरे में आता है और इसका मुख्य उद्देश्य यातायात सुगमता बढ़ाना है। इस मार्ग पर विशेषकर कश्मीरी गेट इलाके में कई गंभीर जाम वाले बिंदु हैं। जहां से गुजरने वाला ट्रैफिक एलिवेटेड रोड पर शिफ्ट कर नीचे की सड़कों पर दबाव कम किया जा सकेगा। यह मार्ग यमुना नदी के समानांतर चलता है, जो ओ-ज़ोन में आता है। ऐसे में परियोजना की योजना मास्टर डेवलपमेंट प्लान के मानकों के अनुरूप बनाई जाएगी।
मेट्रो, ग्रेड सेपरेटर और एएसआई स्मारकों का रखा जायेगा ध्यान
इस कॉरिडोर का मार्ग कश्मीरी गेट जंक्शन के पास ग्रेड सेपरेटर और रेड लाइन मेट्रो से भी गुजरता है, जिससे मौजूदा परिवहन ढांचे के साथ समन्वय एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा मार्ग में सलीमगढ़ फोर्ट सहित तीन एएसआई संरक्षित स्मारक भी आते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान एएसआई के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
रिंग रोड की मूल परिकल्पना को मिलेगा नया रूप
यह परियोजना महात्मा गांधी रिंग रोड की उस मूल परिकल्पना को फिर से जीवित करने की कोशिश है, जिसका उद्देश्य दिल्ली के चारों ओर सुगम और तेज यातायात सुनिश्चित करना था। बीते वर्षों में तेजी से हुए शहरीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या और सार्वजनिक परिवहन की सीमाओं के चलते रिंग रोड दिल्ली के सबसे ज्यादा जाम वाले इलाकों में शामिल हो गई है, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा है।
अधिकारियों के अनुसार, रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर पीक ऑवर में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से मौजूदा सड़क पर दबाव कम होगा और आसपास की प्रमुख सड़कों को भी जाम से राहत मिलेगी। प्रस्ताव है कि एलिवेटेड रोड को सेंट्रल वर्ज पर खंभों के जरिए बनाया जाएगा, ताकि भूमि अधिग्रहण की जरूरत न्यूनतम रहे।