MCD: ‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ मुद्दे पर बीजेपी ने छोड़ा अपने पार्षद का साथ!

-स्टेंडिंग कमेटी बैठक में जोन उपायुक्त ने बताया बीजेपी पार्षद को अवैध निर्माण में ‘शेयर होल्डर’ तो आयुक्त ने कहा थाः ‘ब्लैक मेलर’ और ‘शर्म आनी चाहिए’

एसएस ब्यूरो/ नई दिल्लीः 21 अगस्त।
‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने ही निगम पार्षद का साथ छोड़ दिया है। विपक्ष (आम आदमी पार्टी) ने जहां इसे मुद्दा बनाया तो सत्ता पक्ष (बीजेपी) इस मामले में चर्चा तक से बचती नजर आई। जिसके चलते दिल्ली नगर निगम के हाउस की बैठक गुरूवार को एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामे की भेंट चढ़ गई। आश्चर्य की बात यह रही कि निगम अधिकारियों के बीजेपी पार्षद के ऊपर खुले आरोपों के बावजूद बीजेपी नेता गुरूवार को बैकफुट पर दिखाई दिये।
गुरूवार को सदन की बैठक शुरू होते ही पहले शोक प्रस्ताव पढ़ने एवं मौन रखने के पश्चात दिल्ली में दो एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के लिए बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री को धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। इसी बीच विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में निगम अधिकारियों के द्वारा बीजेपी के एक पार्षद को ‘अवैध निर्माण में शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ कहे जाने का मुद्दा उठाया। अंकुश नारंग ने कहा कि बीजेपी पार्षद ने जनता से जुड़ा मुद्दा उठाया था और एक जेई के द्वारा भ्रष्टाचार का पैसा उपायुक्त पहुंचाने की बात कही थी। इसके बाद जिस तरह से एक उपायुक्त और निगम आयुक्त ने निगम पार्षद के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए जलील किया, उसे बरदाश्त नहीं किया जा सकता।
परंतु नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग के द्वारा यह मुद्दा उठाने पर सत्ता पक्ष के कुछ निगम पार्षद भड़क गये ओर शोर-शराबा करने लगे। इसके साथ ही मेयर राजा इकबाल सिंह ने भी अंकुश नारंग को इस मामले में बोलने की इजाजत नहीं दी। जिसकी वजह से सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से एक-दूसरे पर छींटाकशी भी हुई और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
इस बीच ‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ के मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं होने देने के उद्देश्य से मेयर राजा इकबाल सिंह ने एजेंडा में शामिल प्रस्तावों को लेने का आदेश जारी कर दिया। नेता सदन प्रवेश वाही ने हंगामे के बीच कुछ प्रस्तावों को पास करने और कुछ को रैफरबैक करने की बात कही तो कुछ दूसरे बीजेपी पार्षदों ने इसका समर्थन किया। सदन की यह पूरी कार्यवाही हंगामे की बीच ही हुई और बैठक की कार्यवाही को अगली बैठक तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी गई।
ये है ‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ का मामला
बुधवार को एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक हुई थी, जिसमें निगम अधिकारियों ने बीजेपी के एक निगम पार्षद को ‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ की संज्ञा दी थी। दरअसल झिलमिल वार्ड से बीजेपी के निगम पार्षद पंकज लूथरा ने शाहदरा साउथ जोन के अंतर्गत शाहदरा वार्ड में एक बिल्डिंग के निर्माण में कथित तौर पर बिल्डिंग विभाग के जेई के द्वारा बड़ी रिश्वत मांगे जाने का मामला उठाया था। पंकज लूथरा ने कहा कि मोहित कालरा नामक जेई ने बिल्डिंग का काम रूकवा दिया और तीन लाख रूपये मांगे। जबकि प्रॉपर्टी के मालिक ने एमसीडी से इसका नक्शा पास करवा लिया है। जब मोहित कालरा से प्रॉपर्टी मालिक को परेशान नहीं करने के लिए कहा गया तो उसने कहा कि ‘पैसा उपायुक्त महोदय तक जाना है। मुझे उनके द्वारा मना करवा दो मैं, कोई कार्रवाई नहीं करूंगा।’
पंकज लूथरा ने स्टेंडिंग कमेटी की बैठक में आगे कहा कि इसकी तस्दीक के लिए जब उन्होंने शाहदरा साउथ जोन के उपायुक्त बादल कुमार को फोन किया तो उन्होंने ना तो फोन उठाया और ना ही वापस लौटकर कोई फोन किया। जबकि जेई मोहित कालरा लगातार डिप्टी कमिश्नर साहब को पैसा पहुंचाने की बात कह रहा है। इस बात पर पहले उपायुक्त बादल कुमार भड़क गये और कहा कि ‘अवैध निर्माण में पार्षद का भी शेयर होगा जिसकी वजह से वह ऐसी बातें कह रहे हैं।’
जब पार्षद और उपायुक्त के बीच तनातनी शुरू हुई तो स्टेंडिंग कमेटी चेयरमैन सत्या शर्मा ने बीच में टोकते हुए उपायुक्त बादल कुमार को कहा कि वह किसी चुने हुए निगम पार्षद के ऊपर इस तरह के आरोप नहीं लगा सकते। इसी बीच निगम आयुक्त अश्विनी कुमार ने सत्या शर्मा को बीच में टोकते हुए कहा कि ‘किसी ऑफिसर पर गलत कटाक्ष बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। लंबे समय से एमसीडी में चोरी और ब्लैक मेलिंग की प्रथा चली आ रही है। आप कुछ भी बोलते रहें और हमारा अफसर सुनता रहे, शर्म आनी चाहिए आपको।’ निगम आयुक्त अश्विनी कुमार के बयान को बीजेपी पार्षद पंकज लूथरा के मामले में उन्हें ‘ब्लैक मेलर’ कहे जाने को लेकर ही देखा जा रहा है।
बैकफुट पर BJP, छोड़ा अपने पार्षद का साथ
एमसीडी अधिकारियों के द्वारा बीजेपी पार्षद को अवैध निर्माण में ‘शेयर होल्डर’ और ‘ब्लैक मेलर’ कहे जाने के मुद्दे पर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने अपने पार्षद का साथ छोड़ दिया है। गुरूवार को सदन की बैठके दौरान और बाद में नगर निगम में बीजेपी नेता (पार्षद) भीगी बिल्ली बने नजर आये। आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर मेयर, स्थायी समिति अध्यक्ष और सदन के नेता के साथ ही किसी भी निगम पार्षद ने अपना मुंह नहीं खोला और मीडिया के सवालों को टालते हुए नजर आये।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश बीजेपी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट तौर पर निगम के नेताओं को कहा गया है कि इस मामले में कोई एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ कुछ नहीं बोलेगा। बताया जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व इन्ही एमसीडी अधिकारियों से अपने जायज और नाजायज सभी तरह के काम करवा रहा है, ऐसे में यदि इन अधिकारियों के खिलाफ कुछ भी कहा गया तो वह प्रदेश नेतृत्व की पोल खोल सकते हैं। यही कारण है कि स्टेंडिंग कमेटी की बैठक में अपने पार्षद की इतनी बड़ी फजीहत के बावजूद दिल्ली बीजेपी नेतृत्व इस मामले में कुछ भी बालने या कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
पार्षदों में है भारी नाराजगी
दिल्ली बीजेपी नेतृत्व भले ही ‘शेयर होल्डर’ एवं ‘ब्लैक मेलर’ मामले में बैकफुट पर हो, परंतु बीजेपी के निगम पार्षदों में अपने ही नेतृत्व के खिलाफ भारी नाराजगी है। कई निगम पार्षदों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी के बड़े नेताओं ने अपनी पोल खुलने के डर से निगम अधिकारियों के खिलाफ बोलने पर पाबंदी लगा दी है और इनके खिलाफ पार्टी की ओर से भी कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करने वालों में वह निगम पार्षद भी हैं जो निगम के कुछ बड़े पदों पर आसीन हैं। उनका कहना है कि निगम अधिकारी हमें कुछ नहीं समझते और नाही आसानी से जनता से जुड़े कोई काम करते हैं। ऐसे में स्टेंडिंग कमेटी में जो मामला हुआ उसके बाद तो अफसरों के हौसले और ज्यादा बढ़ गये हैं।