स्टॉक लिमिट के विरोध् में गल्ला मण्डियां व दाल मिलों में हड़ताल

-केंद्र की मोदी सरकार ने व्यापारियों के लिए तय की स्टॉक लिमिट

एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा दालों के लिए स्टॉक लिमिट तय किये जाने के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने शुक्रवार 16 जुलाई 2021 को देशभर की 7000 मण्डियां और 12000 दाल मिलों को बंद रकखने का ऐलान किया है। 2 जुलाई को जारी आदेश के मुताबिक दाल (मूंग को छोड़कर) के थोक व्यापारी, रिटेल व्यापारी, आयातक/मिलर के लिये स्टॉक सीमा प्रभावी की गयी है। थोक विक्रेताओं के लिये स्टॉक सीमा 200 मीट्रिक टन (जिसमें एक किस्म की मात्रा 100 मीट्रिक टन) लागू करते हुए प्रभावी की गयी है।

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आदेश में कहा गया है कि खुदरा विक्रेताओं के लिये सीमा 5 मीट्रिक टन रखी गयी है। मिलर के लिये स्टॉक सीमा विगत 3 माह के उत्पादन अथवा वार्षिक संस्थापित क्षमता का 25 प्रतिशत इनमें से जो अधिक हो, ही होगी। आयातक के लिए स्टॉक सीमा 200 मीट्रिक टन ही रखी गई है। 30 दिन में यानी जुलाई महीने में ही हर व्यापारी को अपना स्टॉक सीमा में लाना होगा। सरकार द्वारा जारी यह आदेश 31-10-2021 तक के लिये प्रभावी रहेगा।

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बताया जा रहा है कि एक दिन की बंदी की वजह से करीब 42 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा। इसमें 840 करोड़ रुपये का व्यापारियो के मुनाफे का भी नुकसान होने की संभावना है। इससे केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार को लगभग 1680 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। इसी प्रकार 12000 दाल मीलें बंद होने के कारण लगभग 12000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। 280 करोड़ रुपये का दाल मीलों को मुनाफे का तथा 560 करोड़ रुपये केन्द्र और राज्य सरकार के रेवेन्यू का नुकसान संभावित है।

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भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी पवन कुमार ने दावा किया है कि मण्डियां तथा दाल मीलें बंद होने के राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटका, केरल, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडू, उत्तराखण्ड, हिमाचलप्रदेश, तेलंगाना, हैदराबाद, बिहार, मध्यप्रदेश, दिल्ली छत्तीसगढ़, चेन्नई, झारखण्ड, महाराष्ट्र, बंगाल, उड़ीसा, चण्डीगढ़ आदि प्रांतों से समर्थन पत्र प्राप्त हो गये हैं। सभी प्रांतों में मण्डियां तथा दाल मीलें अपना व्यापार बंद रखेंगे। सभी प्रांतों के व्यापारियों में तथा दाल मिल मालिकों में घबराहट पैदा हो गयी हैं कि 31 तारीख तक स्टॉक को लिमिट में लाना है। और बाजार में कोई खरीददार नहीं है। स्टॉक को लिमिट में लाने के कारण व्यापारी तथा उद्योग को बहुत बड़ा नुकसान होगा। वह दिवालिया भी हो सकता है। समर्थन पत्र में व्यापारियों ने रोष प्रकट करते हुए लिखे हैं कि यह केन्द्र सरकार की हठधर्मिता है। वह इस तरह के कानून को वापिस नहीं ले रही हैं।

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गौरतलब है कि देश में विभिन्न दालों का वार्षिक उत्पादन लगभग 256 लाख टन है, और लगभग 20 लाख टन दालों का आयत होता है। 2017 में एक अधिसूचना के माध्यम से सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया गया था कि सरकार के पोर्टल पर 6 प्रकार की दालों, मसूर, चना, तूर, उड़द, मूंग और काबली चना की स्टॉक सीमा अपलोड की जाएगी, जिसका व्यापारियों द्वारा विधिवत पालन किया जा रहा है। 2020 में सरकार ने स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि आवश्यक वस्तु अधिनियम या स्टॉक सीमा तभी लागू होगी जब दालों की कीमत या तो एमएसपी से 50 फीसदी अधिक होगी या देश में कोई आपातकालीन स्थिति होगी।
व्यापारी नेताओं का कहना है कि सरकार की इस घोषणा की अवहेलना करते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा 2 जुलाई, 2021 को एक अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें कहा गया था कि थोक व्यापारी 200 टन तक दाल का स्टॉक कर सकते हैं और जिसमें से किसी भी एक प्रकार की दाल का 100 टन तक स्टॉक किया जा सकता है। जबकि अन्य दालों के लिए स्टॉक बचे 100 टन में ही करना होगा। दालें मूल रूप से 8 प्रकार की होती हैं और इन 8 प्रकार की दालों को मिलाने और संसाधित करने के बाद 30 से अधिक प्रकार की दालों में परिवर्तित किया जाता है। यह कल्पना से परे है कि थोक विक्रेता कैसे सिर्फ 100 टन में 30 से अधिक प्रकार की दालों को स्टॉक कर सकते हैं।
अधिसूचना के मुताबिक मिलर्स को 15 मई के बाद प्राप्त माल के लिए कस्टम क्लीयरेंस की तिथि से 45 दिनों के भीतर अपने स्टॉक को समाप्त करना होगा। अन्यथा उन्हें थोक विक्रेताओं के लिए निर्धारित स्टॉक सीमा का पालन करना होगा। जबकि 15 मई, 2021 से पहले मिलर्स पर ऐसी कोई सीमा नहीं थी। देश भर में 50 हजार से अधिक मिलर्स हैं, जो दालों के प्रसंस्करण और परिष्करण गतिविधियों में लगे हुए हैं। आम तौर पर एक मिलर 3 हजार से 5 हजार टन तक कच्ची दालों का स्टॉक रखता है।
दालों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद उठाया गया कदम
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से दालों पर स्टॉक सीमा तय किये जाने का कदम देश में दालों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। देश भर के विभिन्न राज्यों में दालों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे थे, जिसकी वजह से आम लोगों की जेब पर भारी भार पड़ रहा था। लोगों के खाने की थाली से दालें लगातार दूर होती जा रही थीं। जिसके बाद सरकार ने स्टॉक सीमा तय करने का फैसला किया है। बता दें कि दालों के साथ ही देश में सरसों के तेल के भाव भी पिछले कुछ दिनों में अचानक बढ़ गये हैं। जबकि देश में तिलहनो व दलहनों के उत्पादन में किसी भी तरह की गिरावट नहीं आई है।