-दक्षिण अफ्रीकी देश माली के राष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा
-संसद भंग, वित्तमंत्री अब्दुलाय दफे व अन्य हिरासत में
पश्चिम अफ्रीकी देश माली विद्रोही सैनिकों ने तख्तापलट कर दिया है। माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता और प्रधानमंत्री बाउबो सिसे को विद्रोहियों ने बंधक बना लिया है। इसके बाद राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता ने अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया। बता दें कि राष्ट्रपति के पद से हटने की मांग को लेकर देश में कई महीने से प्रदर्शन हो रहे थे। इसके बाद विद्रोही सैनिकों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया।
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समाचार एजेंसी के अनुसार बंदूक के दम पर हिरासत में लिए जाने के बाद माली के राष्ट्रपति ने इस्तीफा देते हुए संसद भंग करने की घोषणा कर दी है। माली में इससे पहले 2012 में तख्तापलट हुआ था और उससे इस तख्तापलट की कोशिश में कई समानताएं बताई जा रही हैं। विद्रोही सैनिकों ने मंगलवार को राष्ट्रपति के आवास को घेर लिया और तख्तापलट की संभावित कोशिश के तहत हवा में गोलीबारी करते हुए उन्हें और प्रधानमंत्री को बंधक बना लिया।
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बमाको शहर की सड़कों पर सैनिक खुलेआम हथियार लेकर घूमते दिखे। तस्वीरों से और स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में उनका नियंत्रण हो गया है। माली का सरकारी टीवी चैनल (ओआरटीएम माली) को बंद कर दिया गया है। एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मंगलवार की शाम को बंधक बना लिया गया। माली में राजनीतिक संकट अचानक से बढ़ा है। जहां संयुक्त राष्ट्र और पूर्व उपनिवेश फ्रांस ने देश में स्थिरता का माहौल बनाने के लिए 7 साल कोशिश की हैं।
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सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने भी सन्य कार्रवाई की सराहना की है। कुछ लोगों ने माली के न्याय मंत्री से संबंधित एक इमारत में आग लगा दी। प्रधानमंत्री सिसे ने सैनिकों से हथियार डालने का आग्रह किया है और उनसे सबसे पहले देश के हित में सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान बातचीत के जरिए नहीं किया जा सकता है।
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इससे पहले दिन में सशस्त्र लोगों ने देश के वित्त मंत्री अब्दुलाय दफे समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था और इसके बाद सरकारी कर्मचारी अपने कार्यालयों से भाग गए थे। माली के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, इसे लेकर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है।
चुनाव नतीजों को लेकर लोगों में नाराजगी
मई से ही राष्ट्रपति को जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उस समय माली की सर्वोच्च अदालत ने विवादित संसदीय चुनावों के नतीजों को पलट दिया था। इससे पहले 2012 में भी देश की सेना ने तख्तापलट को अंजाम दिया था। अमेरिका के साथ ही रूस और फ्रांस समेत कई देश माली के हालातों पर नजर बनाए हुए हैं।