-प्रोजेक्ट-2, शाहदरा नॉर्थ जोन के इंजीनियरिंग विभाग के हालात
एसएस ब्यूरो/ उत्तर पूर्वी दिल्ली, 16 जून, 2022
केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती और विशेष अधिकारी अश्विनी कुमार भले ही तीनों नगर निगमों को मिलाकर एक हुए दिल्ली नगर निगम की छवि को सुधारने में जुटे हों, लेकिन खुद निगम अधिकारी इसकी छवि को सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं। फिलहाल मामला शाहदरा नॉर्थ जोन के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोजेक्ट-2 का है। यहां एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।
हालात इतने खराब हैं कि डिवीजन के द्वारा कराये जा रहे काम कितने फीसदी हो चुके हैं और वर्तमान में उनकी क्या स्थिति है? इसकी जानकारी जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनयर में से किसी के पास नहीं होती। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि यह बात खुद यहां के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पीआर मीणा और उनके डिवीजन के सहयोगी अधिकारियों ने स्वीकारी है।
प्राप्त सूचना के मुताबिक एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने जब शाहदरा नॉर्थ के प्रोजेक्ट-2 से सूचना मांगी कि उन्हें डिवीजन द्वारा कराये जा रहे विकास कार्यों की प्रोग्रेस रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाये। तब संबंधित जनसूचना अधिकारी यानी कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर महोदय ने बताया कि उनके पास इस तरह की कोई सूचना नहीं होती है। मामला प्रथम अपील में गया तो वहां भी प्रोजेक्ट-2 डिवीजन के अधिकारियों ने कहा कि वह इस तरह की कोई सूचना रखते ही नहीं हैं कि कौन सा विकास कार्य कितने फीसदी तक पूरा हो गया है।
जब गृह मंत्रालय से लेकर दिल्ली नगर निगम के आला अधिकारी लगातार नगर निगम की छवि को सुधारने में जुटे हों तब प्रोजेक्ट-2 डिवीजन के इंजीनियरिंग विभाग के इंजीनियरों (अधिकारियों) का यह रवैया अपने आप में दर्शाता है कि ऐसे अधिकारियों के दम पर नगर निगम की छवि और कामकाज को नहीं सुधारा जा सकता।