-दलित विरोधी बीजेपी ने एमसीडी की एससी कमेटी में छीन लिए दलितों के अधिकारः अंकुश नारंग
-बीजेपी ने अपना चेयरमैन बनाने के लिए 35 सदस्यीय एससी कमेटी को कम करके 21 सदस्यीय कर दियाः अंकुश नारंग
एसएस ब्यूरोरु/नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025।
पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली नगर निगम की अनुसूचित जाति से संबंधित कमेटी के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद हार जाने के डर से एमसीडी की कमेटियों को चुनाव रोक दिया था। इस बात का खुलासा आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को किया। आप ने एमसीडी की एससी कमेटी में सदस्यों की संख्या में भारी कटौती करने को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। एमसीडी में आप के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि सत्ता की लोभी बीजेपी दलित विरोधी है। इसलिए उसने अपना चेयरमैन बनाने के लिए 35 सदस्यीय एससी कमेटी को कम करके 21 सदस्यीय कर दिया है। क्योंकि उसके पास सिर्फ 9 दलित पार्षद ही हैं। जबकि एमसीडी में 42 में से 31 दलित पार्षद ‘‘आप’’ के हैं।
अंकुश नारंग ने सवाल किया कि अगर एससी कमेटी का चेयरमैन ‘‘आप’’ का बन जाता तो क्या बिगड़ जाता? सिर्फ सत्ता के लोभ में बीजेपी ने 14 दलित पार्षदों का अधिकार छीन लिया है। अगर ये पार्षद कमेटी में होते तो अपने समाज की आवाज उठाते, लेकिन बीजपी ने इससे भी उन्हें वंचित कर दिया। अंकुश नारंग ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि कुछ दिन पहले एमसीडी की कमेटियों का चुनाव होना था, लेकिन महापौर राजा इकबाल सिंह ने अचानक एक नोटिस जारी कर कमेटियों के चुनाव को रोक दिया। क्योंकि वह 10 जुलाई को आयोजित सदन की बैठक में एक प्रस्ताव लाना चाहते थे। यह किसी को भी नहीं पता था कि महापौर कमेटियों में क्या संशोधन करना चाहते थे। अब वह संशोधन सामने आ गया है। बीजेपी के मेयर ने कमेटियों में जो संशोधन किया है, वह पूरी तरह से दलित विरोधी कार्य है।
अंकुश नारंग ने कहा कि अभी तक एमसीडी में अनुसूचित जाति की कमेटी 35 सदस्यों की होती थी। लेकिन बीजेपी संशोधन प्रस्ताव लाकर अनुसूचित जाति की कमेटी को 21 सदस्यीय कर दिया है। अनुसूचित जाति की एक कमेटी से बीजेपी ने 14 सदस्य कम कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा आदर्शवाद की बहुत बात करती है और मेयर राजा इकबाल सिंह सिद्धांतों की बात करते हैं। एमसीडी चुनाव के दौरान 42 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित थी। इसमें से 36 सीटें आम आदमी पार्टी जीती। दलित समाज ने बीजेपी को एमसीडी चुनाव में दरकिनार कर दिया। बीजेपी ने एससी की मात्र 6 सीटें ही जीत सकी। इसके बाद भाजपा ने ईडी-सीबीआई से डराकर आम आदमी पार्टी के कुछ पार्षदों को तोड़ लिया।
अंकुश नारंग ने आगे कहा कि बीजेपी के पास एससी के पार्षद ही नहीं हैं। इसलिए बीजेपी ने एससी की कमेटी की सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर 21 कर दी है। बीजेपी के पास वर्तमान में 9 पार्षद दलित समाज से हैं। इसलिए उसने अपने 9 पार्षद कमेटी में शामिल कर दिए। जबकि 7 पार्षद ‘‘आप’’ और 2 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के हैं। जबकि आवंटित लिस्ट में आईवीपी का एक पार्षद था। कांग्रेस का भी एक पार्षद सूची में था, लेकिन उसके पास दलित पार्षद नहीं था। तो बीजेपी ने कांग्रेस का कोटा आईवीपी को दे दिया। इससे साफ है कि इस कमेटी के चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आईवीपी मिलकर काम कर रहे हैं। बीजेपी के पास सिर्फ 9 पार्षद ही एससी के थे, इसलिए इन्होंने 21 सदस्यीय कमेटी बना दी।
महापौर ने खारिज किये सभी आरोप
महापौर राजा इक़बाल सिंह ने विपक्ष के तदर्थ समिति से संबंधित आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी दलित विरोधी पार्टी है, जिसने सत्ता में रहकर ढाई वर्षों तक अनुसूचित जाति के कल्याण और कोटे से जुड़ी तदर्थ समिति का गठन नहीं होने दिया। वह अब भी यही चाहते हैं कि अनुसूचित जाति के कल्याण तथा कोटे के कार्यान्वयन से जुड़ी तदर्थ समिति का गठन न हो। इसके लिए वे बिना किसी तथ्य के आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी न विधान को मानती है और न ही संविधान को, इसलिए वे नियमों के अनुसार होने वाले कार्यों का लगातार विरोध कर रही है।