दिल्ली BJP का ‘सितम’ वाला प्लानः पार्षदों-रिश्तेदारों को नहीं मिलेगा टिकट?

-केवल ‘गैरों’ पर होगा ‘टिकट’ का करम!

हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्लीः 2 जनवरी।
‘गैरों पे करम, अपनों पे सितम’ वाली पंक्तियां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निगम पार्षदों पर सटीक बैठ सकती हैं। इंद्रप्रस्थ के सियासी मैदान में चर्चा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में बीजेपी अपने पार्षदों और उनके रिश्तेदारों को टिकट नहीं देगी। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने यह फैसला किया है कि ‘पहले की तरह’ केवल ‘जिताऊ’ लोगों को चुनाव में उम्मीदवार बनाया जायेगा।
बीजेपी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पार्टी के ज्यादातर निगम पार्षद दिल्ली विधानसभा चुनाव में टिकट चाहते हैं। परंतु पार्टी जिताऊ उम्मीदवारों पर दांव लगाना चाहती है। इसके चलते अपने निगम पार्षदों की एंटी इनकंबैंसी से भी बचना चाहती है। ऐसे में नये या फिर जो लोग अभी निगम पार्षद नहीं हैं, ऐसे लोगों को चुनावी मैदान में उतारने का मन बनाया गया है।
बीजेपी के एक और वरिष्ठ नेता का कहना है कि ऐसा कोई हार्ड एंड फास्ट रूल नहीं है। जिन सीटों पर किसी निगम पार्षद के जीतने की ज्यादा संभावनाएं हैं, किसी निगम पार्षद को भी लड़ाया जा सकता है। लेकिन कोशिश यही रहेगी कि वर्तमान निगम पार्षदों और उनके रिश्तेदारों को टिकट नहीं देकर अन्य लोगों को आजमाया जाये। दरअसल 1998 से बीजेपी दिल्ली में सरकार से बाहर है। 15 वर्षों तक लगातार कांग्रेस और अब 2013 से आम आदमी पार्टी सत्ता में है। ऐसे में बीजेपी की हर संभव कोशिश है कि किसी भी तरह से पार्टी दिल्ली की सत्ता में वापसी कर सके।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने यह भी फैसला किया है कि दो-तीन बार या इससे ज्यादा लगातार विधानसभा चुनाव हारने वालों को भी टिकट नहीं दिया जायेगा। हालांकि एक-दो विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां नये लोगों में ज्यादा मजबूत दावेदार नहीं हैं। ऐसे में कुछ पुराने लोगों पर भी पार्टी दांव खेल सकती है।