-यूईआर पर टोल टैक्स और मेट्रो किराया बढ़ाकर बीजेपी ने किया दिल्ली के लोगों पर दोहरा प्रहारः देवेंद्र यादव
-यूईआर-2 द्वारका के लिए जिन किसानों की जमीन ली गई उनको टोल फ्री किया जायेः देवेन्द्र यादव
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली, 26 अगस्त, 2025।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने यूईआर (UER) पर टोल टैक्स लगाये जाने और दिल्ली मैट्रो (Delhi Metro) का किराया बढ़ाये जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सियासी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रही दिल्ली में बीजेपी लोगों की जेब काटने में लगी है। घटती व्यवस्थाओं के बावजूद भाजपा किराए और टोल टैक्स के द्वारा दिल्लीवालों की जेब काटने का काम कर रही है। राजधानी में ध्वस्त और विलुप्त होती डीटीसी के साथ यू.ई.आर. द्वारका पर एक ही शहर में पहली बार भारी टोल और मेट्रो के किराये में वृद्धि करके भाजपा की दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लोगों पर दोहरा प्रहार किया है।
देवेन्द्र यादव ने प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित किया। उनके साथ कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक अनिल भारद्वाज ने मंगलवार के विषय चरमराती परिवहन व्यवस्था और मेट्रो के बढ़े किराए पर अपना संक्षिप्त सम्बोधन रखा। देवेन्द्र यादव ने कहा कि महिलाओं को मुफ्त यात्रा की बात करती है लेकिन भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार ने पिछले 7 महीनों में दिल्ली की सड़कों से सीएनजी की 2217 डीटीसी बसें हटा दी है। जनवरी 2024 में 8040 बसें दिल्ली की सड़कों पर थी जो जुलाई 2025 में 5835 रह गई है। जबकि जनवरी 2024 से जुलाई 2025 तक 2920 डीटीसी बसें कम हुई और सरकार अगले 8 महीनां में 1680 बसें हटेंगी और अगले वित्त वर्ष तक 3897 बसे हटा देगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 40 लाख लोग प्रतिदिन डीटीसी में सफर करते है। बसों की घटती संख्या के कारण लोगों को घंटों बस स्टॉप पर बसों का इंतजार करना पड़ता है, 5835 बसें नाकाफी है। बसों की कमी के कारण लोग अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल करते है और निजी वाहनों और डीटीसी की उम्र खत्म होने के बावजूद चलने वाली बसों से निकलने वाला जहरीला धुंआ राजधानी में 51 प्रतिशत प्रदूषण का कारण है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि रेखा गुप्ता ने बजटीय भाषण या अन्य कार्यक्रमों में इस वित्त वर्ष 5000 इलेक्ट्रिक बसे लाने का वादा किया था, लेकिन 7 महीनों में केवल 785 इलेक्ट्रिक बसें ही जोड़ी है जिनमें 400 देवी बसें है। उन्होंने कहा कि 3897 बसें हटने के बाद यदि 2865 बसें जुड़ भी जाए तो वर्ष 1032 बसें कम रहेगी। भाजपा के मास्टर प्लान 2041 अनुसार बसों की संख्या में वृद्धि करके 18000-21000 तक बढ़ाए जाना है जो प्रति 10 लाख आबादी पर 60-70 बसें उपलब्ध कराई जाऐंगी। मैं कहता हूॅ कि 7 महीनों में सिर्फ 785 बसे जोड़ने वाली रेखा गुप्ता की सरकार 5835 बसों के बेड़े को 21000 तक पहुॅचाने में कितना समय लगाएगी। भाजपा सरकार बेबुनियाद घोषणाएं करके लोगों को भ्रमित करने का काम कर रही है, धरातल पर कुछ भी नही हो रहा है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि कार्ग्रेस ने दो रिंग रोड़ बनाए थे और तीसरा रिंग रोड़ यूईआर-2 को बनाने की शुरुआत 2012 में की थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार जाने के बाद भ्रष्टाचार और दिल्ली के विकास के प्रति उदासीनता के कारण जहां यूईआर-2 बनने में 13 वर्ष का समय लग गया, वहीं यह नेशनल हाईवे सबसे महंगा भी साबित हुआ। जिसके एक किलोमीटर बनने पर 150 करोड़ रुपये खर्च हुआ। 55.4 कि0मी0 पर 5580 करोड़ का रिकॉड खर्च आया। यह पहला हाईवे रहा जिसके पूरा होने से पहले उसमें हुए भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई द्वारा चल रही है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि आज यूईआर द्वारका पर अवैध टोल टैक्स के विरोध में दिल्ली के गांवों के किसान पंचायत कर रहे है जिनकी जमीन अधिग्रहण करके यूईआर बनाया गया है क्योंक इन किसान भाईयों को अब इस रोड़ निजी वाहन चलाने के लिए 20 किलोमीटर के लिए 350 रुपये का टोल टोल देना पड़ रहा जबकि पूरे देश में 20 किलोमीटर पर 150 रुपये का टोल है। श्री यादव ने कहा कि हम किसानां की पंचायत का समर्थन करते है और मांग करते है कि दिल्ली के उन गांव के किसानों जिनकी जमीन अधिग्रहित की गई उनके निजी वाहनों के लिए निशुल्क आवाजाही होनी चाहिए।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह सरकार द्वारा लूटने का नया फार्मूला है कि 34.153 कि0मी0 लम्बे यू.ई.आर.-2 द्वारका पर 119.260 कि0मी0 के हिसाब से टोल वसूला जा रहा है। यह मार्ग चौड़ा होने की वजह से इसकी लम्बाई 119 कि0मी0 मेजरमेंट करके इस पर अधिक टोल वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की वाहनों का पंजीकरण और स्थानीय निवासी के प्रमाण के आधार पर इन किसानों को यूईआर पर निशुल्क आवाजाही की इजाजत दी जानी चाहिए और 350 टोल को कम करके 150 किया जाए।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो के किराया बढ़ोतरी पहली बिना जनता की सलाह और फिक्सेशन कमेटी के हुआ है, जबकि 2017 में जब रेट बढ़े थे तब ऐसा प्रावधान किया गया था कि मेट्रो किराए वृद्धि में फिक्सेशन कमेटी की जरुरी नही होगी। मेट्रो का 1-4 रुपये किराए में बढ़ोत्तरी और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाईन पर 5 रुपये तक की बढ़ोतरी मेट्रों ने राईडरशिप में कमी और नुकसान की कमी पूरी करने के नाम पर की है। जबकि कांग्रेस की सरकार ने मेट्रो का किराया कभी नही बढ़ाया और घड़ियाली आंसू बहाने वाली आम आदमी पार्टी ने मेट्रो किराए में 91 प्रतिशत की वृद्धि की थी जिसके कारण नई मेट्रो लाईने बनने के बाद रिडरशीप में भारी गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि 2011 में जहां रिडरशिप 9921 प्रति कि0मी0 थी वह 2017-18 में घटकर 8543 हो गई।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि मेट्रो किराए बढ़ोतरी के वक्त भाजपा के प्रतिनिधि ने किराया बढ़ोतरी का विरोध तक नही किया। रिडरशिप का आंकलन प्रति कि0मी0 के आधार पर होनी चाहिए न कि केवल कुल यात्रियों की संख्या के आधार पर। कोविड काल और कुप्रबंधन के कारण हो रहे घाटे की भरपाई दिल्ली लोगों से मेट्रो किराए में बढ़ोतरी करके कर रही है। मेट्रो किराए में बढ़ोतरी के लिए कहीं न कहीं सरकार प्राईवेट एजेंसियों को फायदा पहुॅचाने की साजिश भी दिखाई पड़ती है। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी को नियंत्रण करने की बजाय भाजपा की रेखा गुप्ता की सरकार ने 7 महीनों में दिल्ली की जनता को लूटने के रास्ते खोले है, जिसका कांग्रेस पार्टी विरोध करती है।