-वीएचपी ने की नारेबाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
एसएस ब्यूरो/नई दिल्लीः जनवरी 7, 2026।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने राजधानी दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वीएचपी ने कहा है कि प्रधानमंत्री एवं दूसरों को निशाना बनाने वाले भद्दे नारों से जेएनयू की मर्यादा को एक बार फिर से नष्ट किया गया है। इस बार उकसावे की वजह दिल्ली दंगों के आरोपितों उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न मिलना बताया गया।
वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक वक्तव्य में कहा है कि ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि प्रॉसीक्यूशन के पास दोनों के खिलाफ दंगों में शामिल होने से जुड़े सीधे और पुष्टि करने वाले सबूत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वर्ष 2020 में हिंदुओं पर हुए सुनियोजित हमलों के पीछे बड़े षड़्यंत्र से जुड़े अपराधों में उनकी केंद्रीय और मुख्य भूमिका पर भी ध्यान दिया।
उमर और शरजील पर भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ साज़िश रचने का आरोप है। यह जघन्य अपराध है। यह सभी के लिए उचित होगा कि वे ट्रायल का इंतज़ार करें, जहां आरोपितों को अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुट्ठी भर लोगों ने सब्र रखने के बजाय, आधी रात को जेएनयू कैंपस का माहौल खराब करने का दुस्साहस किया। यह शर्मनाक और कायरतापूर्ण है। यूनिवर्सिटी ने एफआईआर दर्ज कराई है। इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी मनमानी करने का लाइसेंस नहीं देती। कब्र खोदने के नारे ऐसे अधिकारों का उल्लंघन हैं, अभद्र और आपराधिक हैं। ये नारे देशवासियों को अंदरूनी खतरों की याद दिलाते हैं और यह याद दिलाते हैं कि हमेशा सतर्क रहना ही आज़ादी की कीमत है।


