-अंकुश नारंग ने पूछाः किसने की बसों की व्यवस्था? राजनीतिक रैली में कर्मचारियों को भेजना उचित है?
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली, 18 अगस्त 2025।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भेजे जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एमसीडी में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सोमवार को मेयर राजा इकबाल सिंह और कमिश्नर को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री (PM Modi) की रैली में निगम कर्मियों को जबरन भेजने पर सवाल उठाते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि किसके आदेश से कर्मचारियों को रैली में जबरन भेजा गया? बसों की व्यवस्था किसने की? बसों के व्यय का भुगतान किस मद से किया गया? क्या किसी राजनीतिक रैली में कर्मचारियों को भेजना उचित है?
अंकुश नारंग ने ने पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा, ‘‘आप’’ पार्षद कुसुम लता, सारिका चौधरी, भगवीर और राकेश लोहिया ने भी मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग को लेकर अपने जोन के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखा है।
अंकुश नारंग ने अपने पत्र में कहा है कि ‘रविवार, 17 अगस्त को दिल्ली के रोहिणी/नरेला क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूईआर-2 के उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर बीजेपी द्वारा एक राजनीतिक रैली का आयोजन किया गया। प्राप्त सूचनाओं एवं प्रमाणों के अनुसार, इस रैली को सफल दिखाने के लिए एमसीडी के विभिन्न जोन एवं वार्डों से सफाई कर्मचारियों, मलेरिया विभाग के कर्मियों, तथा निगम विद्यालयों के शिक्षकों को जबरन बुलाया गया। यह भी ज्ञात हुआ है कि इन कर्मचारियों को धमकी दी गई कि यदि वे रैली में उपस्थित नहीं हुए, तो उनकी सेवा समाप्ति, वेतन रोकने, अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अंकुश नारंग ने कहा है कि रविवार को इन कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश होता है, फिर भी उन्हें जबरन बुलाकर, बसों द्वारा रैली स्थल तक पहुँचाया गया और कुछ मामलों में कॉम्पेन्सेटरी लीव देने का झांसा भी दिया गया। उन्होने कहा कि इस रैली के लिए कर्मचारियों को जबरन लाना किसके आदेश से किया गया? रैली स्थल तक लाने के लिए बसों की व्यवस्था किस विभाग द्वारा की गई? इन बसों के व्यय का भुगतान किस बजट मद से किया गया? क्या किसी राजनीतिक दल की रैली के लिए शासकीय कर्मचारियों को बाध्य करना उचित है?