AAP और BJP की सियासत के बीच दांव पर दिल्ली के व्यापारी!

-आप सरकार ने नहीं मानी दिल्ली के बाजार खोलने की मांग
-सहयोग स्वरूप व्यापारियों ने खुद शुरू किया था लॉकडाउन
-केजरीवाल सरकार की रायशुमारी पर उठे गंभीर सवाल

हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बीच दिल्ली का व्यापार बुरी तरह से फंस गया है। दोनों दलों की राजनीति के बीच दिल्ली के व्यापारी और कारोबार दांव पर लगे हैं। यह वही व्यापारी हैं जिन्होंने दिल्ली में कोरोना महामारी के तेजी से बढ़ने पर खुद ही दिल्ली सरकार की घोषणा से पहले अपने बाजार बंद रखने का ऐलान कर दिया था। ऐसे में उन्हीं व्यापारियों की बाजार खोलने की पुरजोर मांग पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। यह आप सरकार के उन दावों पर भी गंभीर सवाल उठाता है, जिनमें बार-बार दावा किया जा रहा है कि दिल्ली वालों की रायशुमारी पर ही लॉकडाउन आगे बढ़ाया जा रहा है। केजरीवाल सरकार के लॉकडाउन बढ़ाने के फैसले पर विभिन्न व्यापारिक संगठनों के व्यापारी नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है।

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दिल्ली के शतप्रतिशत व्यापारी और व्यापारी नेता चाहते हैं कि उनकी दुकानें खोलने की इजाजत दी जाये। व्यापारी यह सहयोग देने को भी तैयार हैं कि सभी तरह की गाइडलाइंस का पालन किया जायेगा। व्यापारी यह सहयोग देने के लिए भी तैयार हैं कि यदि समय की कोई पाबंदी लगायी जाये तो वह भी स्वीकार है। फिर भी कोई समस्या है तो व्यापारी नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि पहले ऐसे व्यापारियों को इजाजत दी जा सकती थी, जो कि खुद और अपने कर्मचारियों को वैक्सीन लगवा चुके हैं। कुछ व्यापारी नेताओं का सुझाव है कि सभी व्यापारियों को ऑड-ईवन के आधार पर अपनी दुकानें खोलने की इजाजत दे दी जाये, या फिर एक दिन बंद रखकर दूसरे दिन बाजार खोलने की इजाजत दे दी जाये। दरअसल बीते करीब 45 दिनों से ज्यादातर थोक बाजार और 40 दिनों से खुदरा बाजार बंद हैं। ऐसे में उन्हें अपना माल खराब होने की चिंता भी सता रही है।

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दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने महानगर में लॉकडाउन की अवधि एक सप्ताह बढ़ा दी है। अब 7 जून 2021 की सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन जारी रहेगा। सोमवार से केवल निर्माण इकाईयों (मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स) और निर्माण यानी कन्सट्रक्शन के कार्य को ही छूट होगी। हालांकि इसमें दिल्ली सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इनसे संबंधित कच्चे माल या तैयार माल उपलब्ध कराने वाले उद्योगों यह छूट रहेगी अथवा नहीं। या फिर छूट वाली साइट्स तक तैयार माल या कच्चा माल लाने-लेजाने की छूट रहेगी अथवा नहीं? जबकि दिल्ली के सभी व्यापारिक संगठन चाहते थे कि दिल्ली के बाजार भी 31 मई से खोले जाएं। क्योंकि दिल्ली के बाजार खास तोर पर थोक बाजार लॉकडाउन की सरकारी घोषणा होने से कई दिन पहले से बंद चले आ रहे हैं।

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आश्चर्य की बात तो यह है कि अब दिल्ली के बाजार खोलने का मामला बीजेपी और आम आदमी पार्टी की सियासत में फंस गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ने बाजार खोलने की मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद दिल्ली के उपराज्यपाल ने अपनी ओर से इस आरोप के संबंध में एक ट्वीट तक नहीं किया है। आरोप है कि जब से केंद्र की मोदी सरकार ने उपराज्यापाल को फिर से पुरानी शक्तियां प्रदान की हैं, (यानी कि सभी फैसलों की मंजूरी उपराज्यपाल से लेनी होगी) तभी से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मौके की तलाश में थे। यह पहला मौका आया है जब आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार की उस करतूत का जवाब दिया है, माना जा रहा है आने वाले दिनों में इस तरह की सियासत और बढ़ेगी।

                   प्रवीण खंडेलवाल

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली में सोमवार से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने का दिल्ली के करीब 15 लाख व्यापारियों के लिए कोई महत्व नहीं है। बिना बाजार खोले, आवश्यक निर्माण सामग्री और अन्य वस्तुओं के अभाव में निर्माण गतिविधियां कैसे संचालित होंगी ये बड़ा सवाल है। इसी तरह कारखानों को भी उत्पादन के लिए उनके द्वारा आवश्यक कच्चा माल भी उपलब्ध नहीं होगा क्योंकि दिल्ली में बाजार बंद हैं। आप पार्टी द्वारा आरोप लगाया गया है कि सीएम केजरीवाल ने दुकानें खोलने पर जोर दिया था लेकिन एलजी अनिल बैजल ने दुकानें खोलने से इनकार कर दिया। यहां सवाल ये है कि जिस व्यक्ति का डीडीएमए से कोई वास्ता नहीं है, उसे बैठक की आंतरिक चर्चा के बारे में कैसे पता चला? उसे किसने जानकारी दी? आम आदमी पार्टी की ओर से दिल्ली के एलजी को व्यापार विरोधी के एक पेश करने का प्रयास किया गया है।

                   पवन कुमार

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन पवन कुमार का कहना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला एकदम गलत है। महामारी का असर जब एकदम बढ़ रहा था, तब दिल्ली के व्यापारियों ने खुद सरकार से लॉकडाउन लगाने की मांग की थी। अब जबकि इसका असर केवल शुरूआत के स्तर पर आ गया है, ऐसे में दिल्ली के बाजारों को तुरंत खोला जाना चाहिए। क्योंकि यदि कोरोना के मामले फिर से बढ़ते हैं तो फिर से कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। वह व्यापारी वर्ग ही है जो स्वयं का पैसा लगाकर व्यापार करता है और विभिन्न प्रकार के टैक्स इकट्ठा करके सरकार को देता है। हमारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से आग्रह है कि वह तुरंत व्यापारियों की मांग पर ध्यान देते हुए एक-दो दिन में दिल्ली के बाजारों को कुछ शर्तों के आधार पर खोलने की इजाजत दें। ताकि लगातार नुकसान की ओर बढ़ते व्यापारियों के कारोबार को कुछ राहत मिल सके।

                    सुशील गोयल

कैमिकल मर्चेट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष (20 साल) एवं कैट के चेयरमैन सुशील गोयल का कहना है कि सरकार द्वारा आगामी सोमवार से जो अनलौक की घोषणा की गयी है, वह उचित नहीं है। यदि किसी जगह अधूरा पड़ा हुआ निर्माण कार्य शुरु करना है तो निर्माण सामग्री सीमेंट, लोहा, ईंट आदि की दुकानें सैनिटरी एवम हार्डवेयर के सामान की दुकानें खुलनी आवश्यक हैं। फैक्ट्री खोलने का निर्णय भी दुकानें बंद होने पर बेकार है, हर फैक्ट्री में निर्माण हेतु कच्चा माल तथा तैयार माल की सप्लाई मार्केट पर ही आधारित है। अतः सरकार को इस आदेश पर पुनर्विचार करके सीमित समयानुसार मार्केट खोलने का आदेश पारित करना चाहिए। इस बारे में कैट ने विस्तार पूर्वक एक पत्र उपराज्यपाल जी को तथा मुख्यमंत्री केजरीवाल को 26 मई को भेजा है लेकिन व्यापरियों के सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
आज के भयावह वातावरण में जहां जान-माल का अथाह नुकसान हो रहा है, लाखों-लाख व्यक्ति कोरोना के कारण, काल का ग्रास हो गये। दिल्ली का मध्यमवर्गीय व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। मार्च 2020 से चरणबद्ध तरीके से लागू हुएं लौकडाउन ने जहां एक ओर व्यापारियों को आर्थिक तौर पर कमजोर करके रख दिया है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के वर्चस्व की लड़ाई एवं दिल्ली सरकार की खींचतान का खमियाजा दिल्ली के नागरिकों विषेशकर व्यापारी समाज को भुगतना पड रहा है। दिल्ली सरकार उपराज्यपाल का नाम लेकर हर जिम्मेदारी से बच रही है।

                    संदीप खंडेलवाल

दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप खंडेलवाल का कहना है कि दिल्ली सरकार की नीतियों की वजह से बजट होटल कारोबारियों का करोड़ों रूपया बर्बाद हो गया है। पुरानी लाइसेंस नीति के कारण बजट होटल कारोबार मृत्यु के कगार पर है। सरकार इन्हें खोलने की इजाजत नहीं दे रही है। बीते एक साल में करीब 20 ज्ञापन भेजे गये हैं, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक भी ज्ञापन का जवाब नहीं मिला। कारोबारियों को रखरखाव पर भारी खर्च करना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि कम से कम बिजली और पानी के दामों में ही आधी छूट दे दी जाये। लेकिन व्यापारियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में दिल्ली का बजट होटल कारोबार किस तरह से सुरक्षित हो पायेगा?
दिल्ली उद्योग व्यापार संगठन एवं कैमिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी कैलाश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार की एक्सपर्ट कमेटी, दिल्ली के

                      कैलाश गुप्ता

शीर्ष राजनीतिक दलों के नेताओं और दिल्ली के लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्यों की एक बैठक तुरंत बुलाकर दिल्ली की बाजारों को खोलने पर चर्चा की जाये। इस बैठक की रिपोर्ट के आधार पर बाजारों को खोला जाये। इससे सभी तरह की सियासत पर भी रोक लगायी जा सकेगी और दिल्ली के व्यापारियों को भी यह पता चल सकेगा कि कौन वास्तव में व्यापारियों के साथ है और कौन केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है? दिल्ली के व्यापारियों का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है, अतः इस मुद्दे पर किसी भी दल को राजनीति नहीं करनी चाहिए। समस्या खड़ी होने पर व्यापारियों ने खुद लॉकडान की मांग की थी, तो उन्हीं की मांग पर अब तुरंत लॉकडाउन खत्म किया जाना चाहिए।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल दिल्ली के महामंत्री हेमंत गुप्ता ने कहा कि मेरे हिसाब से अब मार्केट खुलने चाहिए। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल पहले भी पत्र के माध्यम से उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से व्यापारियों की मंशा बता चुका है। क्योंकि

                     हेमंत गुप्ता

अब बीमारी की स्थिति काफी कंट्रोल में है। संक्रमण दर भी लगभग 1 फीसदी के आसपास आ गया है। इस समय व्यापारी आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। व्यापारियों को काफी उम्मीद थी कि 31 मई से बाजार क्रमबद्ध तरीके से खुल जाएंगे। परंतु ऐसा नहीं हुआ अब इस पर भी राजनीतिक हो रही है और व्यापारी इस संकट को झेल रहा है। अब मुख्यमंत्री को तुरंत इस बात को संज्ञान में लेते हुए बाजारों को तुरंत खोलने का ऐलान कर देना चाहिए। यदि एक सप्ताह और इस फैसले को टाला गया तो व्यापारी वर्ग और अधिक संकट में आ जायेगा।
किराना कमेटी दिल्ली के पूर्व महासचिव एवं कोषाध्यक्ष संजय भाटिया का कह

                   संजय भाटिया

ना है कि दिल्ली के बाज़ारों को भी 31 मई से ऑड-ईवन के आधार पर खोला जाना चाहिये। पहले ही बाज़ारों के बंद होने के कारण व्यापारियों का बहुत नुक़सान हो चुका है। उत्तर प्रदेश में  अभी दिल्ली से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन फिर भी दिल्ली के बाद लॉकडाउन शुरू करने वाली यूपी सरकार ने सोमवार से व्यापारियों और कारोबार को बड़ी छूट देने की घोषणा कर दी है। अगर इन बाज़ारों की वजह से कोरोना के मामले बढ़ते हैं तो दोबारा दिल्ली में लॉकडाउन लगाया जा सकता है। व्यापारी पहले भी सहयोग करते आये हैं और अब भी सहयोग करते रहेंगे। दिल्ली सरकार से हमारी पुरजोर मांग है कि अब दिल्ली के व्यापारियों की आवाज को सुना जाना चाहिए।

                      रमेश बजाज

वरिष्ठ व्यापारी नेता रमेश बजाज ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी हर तरह से सरकार का सहयोग कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान व्यापारियों ने पूरा सहयोग किया है। अब क्योंकि लंबे समय से व्यापारियों की दुकानें बंद हैं, इसी दौरान कई दिन बारिश भी हो चुकी है। ऐसे में व्यापारियों का माल खराब होने की आशंका है। दूसरी ओर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कार्यालयों में व्यापारियों का माल पड़ा है। उसकी देखभाल और उसे पहुंचाना भी जरूरी है। दूसरी ओर व्यापारियों के सिर पर बिजली, पानी, कर्मचारियों की सेलरी और दूसरे कई खर्च भी हैं, जिनकी जिम्मेदारी केवल व्यापारियों के ऊपर ही है। ऐसे में जबकि दिल्ली में कोरोना के मामले भी आशानुरूप तेजी से घटे हैं, तो तुरंत दिल्ली के बाजारों को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। सरकार चाहे तो कुछ शर्तें भी लगा सकती है, ताकि महामारी को दिल्ली में अपने पैर दोबारा से पसारने का मौका नहीं मिले।

                     नरेश सांभर

जवाहर नगर कमला नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश सांभर का कहना है कि दिल्ली के बाजारों को तुरंत खोला जाना चाहिए। दिल्ली के व्यापारी इस समय बहुत बड़ी समस्या से गुजर रहे हैं। दिल्ली में परिस्थितियां यह निर्णय लिये जाने के लिए उपयुक्त हैं। दिल्ली के सभी व्यापारी चाहते हैं कि अब उन्हें अपनी दुकानें खोलने की छूट दी जाये। जितनी परेशानी व्यापारियों को है, उतनी ही परेशानी उपभोक्ताओं को भी है। ऐसे में लंबे समय तक बाजारों को बंद नहीं रखा जाना चाहिये। व्यापारियों को अपने माल की चिंता के साथ दुकानों के रखरखाव और कर्मचारियों की भी चिंता है। बिना कारोबार किये यह खर्चे नहीं उठाये जा सकते। अतः दिल्ली सरकार से हमारी मांग है कि दिल्ली के बाजारों को तुरंत खोलने की इजाजत दी जाये।

                       पीआर झा

व्यापारी पीआर झा ने कहा कि लंबे लॉकडाउन की वजह से छोटे-बड़े सभी व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। व्यापारियों को अपने कर्ज की ईएमआई चुकानी पड़ रही है, बच्चों की फीस और दूसरे खर्चे करने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर उनका कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ा है। कोई भी व्यापारी नहीं चाहता कि वह मौत के मुंह में रहकर अपना व्यापार करे। लेकिन अब दिल्ली की परिस्थितियां बदल गई हैं। जब खाने-पीने की चीजों की दुकानों और कन्स्ट्रक्शन साइट व फैक्ट्री खोलने से कोरोना नहीं बढ़ रहा है तो बाजारों को खोलने से भी कोरोना नहीं बढ़ेगा। पिछले साल भी लॉकडाउन खुलने के बाद का अनुभव हम देख चुके हैं। सरकार चाहे तो ऑड-ईवन के आधार पर दुकानें खोलने की छूट दे सकती। हरेक बाजार एक दिन खोलकर दूसरे दिन बंद रखा जा सकता है। लेकिन लॉकडाउन बढ़ाना अब कोई विकल्प नहीं रह गया है, इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए।

                     राकेश यादव

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने 31 मई से दिल्ली के बाजार नहीं खोलने का गलत फैसला लिया है। जब 100 फीसदी व्यापारी चाहते हैं कि बाजार खोले जाने चाहिए, तब किसकी सलाह पर लॉकडाउन को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया गया है। अपनी जिम्मेदारियों को दूसरे लोगों पर डालना भी पूरी तरह से गलत है। आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया है कि उपराज्यपाल ने बाजार खोलने की इजाजत नहीं दी है। लेकिन यह फैसला तो मुख्यमंत्री और डीडीएम का है, तो फिर उपराज्यपाल कहां से बीच में आ गये। व्यापारियों ने सरकार के हर फैसले में साथ दिया है, लेकिन अब व्यापारी खुद संकट में फंस गये हैं। उन्हें अपने व्यापार के साथ अपने कर्मचारियों और माल की भी चिंता है। इसके लिए अब अगले रविवार तक का इंतजार नहीं किया जाना चाहिये और तुरंत दिल्ली के बाजारों को खोलने आदेश जारी किया जाना चाहिए।

               परमजीत सिंह पम्मा

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि दिल्ली के बाजार नहीं खोलने का फैसला गलत है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तुरंत बाजार खोले जाने का आदेश जारी करना चाहिए। व्यापारी कोरोना से संबंधित गाइडलाइंस को फॅालो करना जान गये हैं। दिल्ली के हर व्यापारी का परिवार कोरोना की चपेट से गुजरा है। ऐसे में कोई व्यापारी खुद नहीं चाहता कि कोरोना को किसी भी तरह से बढ़ने दिया जाए। लेकिन अब व्यापारी वर्ग गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे में उसके पास दुकान खोलकर अपना माल और कारोबार संभालने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को अब बिना देर किये एक-दो दिन में ही तय गाइडलाइंस के साथ सभी तरह का व्यापार खोलने की इजाजत दी जानी चाहिए।

                     कमल कुमार

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं व्यापार संघ, मेन सदर बाजार के महासचिव कमल कुमार का कहना है कि जब भी देश में कोई संकट का समय आया है तो व्यापारी वर्ग ने हमेशा आगे कदम बढ़ाते हुए देश की तन मन धन से सेवा की है। लेकिन पिछले एक वर्ष से ज़्यादा समय से जो स्थिति उत्पन्न हुई है व्यापारी वर्ग धन से सेवा करने के योग्य तो अब रहा नहीं। फिर भी व्यापारी वर्ग ने केंद्र और दिल्ली सरकार के हर आदेश को अपने सर माथे पर रखा है। लेकिन इस बार जो दिल्ली सरकार ने अनलॉक में दुकानों को न खोलने का का निर्णय किया है वह बहुत ही निराशाजनक और पीड़ादायक है। दुकानदारों की हिम्मत अब जवाब दे चुकी है, अगर शीघ्र बाज़ार खोलने का आदेश नहीं दिया गया तो दुकानदारों की रही सही कमर भी टूट जाएगी। वैसे यह भी गंभीरता से सोचने का विषय है कि अगर बाज़ार ही नहीं खुलेंगे तो फैक्ट्री वाले अपना उत्पाद किसको बेचेंगे और निर्माण गतिविधि करने वाले अपने निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट, ईंट आदि कहां से खरीदेंगे?

                 विजय प्रकाश जैन

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री विजय प्रकाश जैन ने कहा कि व्यापारी कभी भी सरकार के खिलाफ नहीं जाता है। लेकिन सरकार को भी व्यापारियों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। दिल्ली की आप सरकार को दिल्ली के व्यापारियों के हित में तुरंत दिल्ली के बाजार खोलने का आदेश जारी करना चहिए। जब यूपी सरकार इस तरह के आदेश दे सकती है तो दिल्ली सरकार क्यों नहीं? हम समझते हैं कि सुरक्षा भी जरूरी है, अतः इसके लिए कुछ विकल्प रखे जा सकते हैं। सप्ताहांत में शनिवार और रविवार को पूर्ण लॉकडाउन रखा जा सकता है। हर बाजार को ऑड और ईवन के आधार पर एक दिन बंद और एक दिन खुला रखा जा सकता है। दुकानों पर कर्मचारियों की संख्या को कम से कम तय किया जा सकता है। कंटेनमेंट जोन में आने वाले इलाकों में लॉकडाउन जारी रखा जा सकता है। लेकिन अब दिल्ली सरकार को बाजार खोलने के लिए और एक सप्ताह का इंतजार नहीं करना चाहिए।

                      धर्मेंद्र कुमार

दूसरी ओर हॉकर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी का मानना है की उन सभी रेहड़ी पटरी वाले जो फल सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुएं सप्लाई कर रहे हैं उनको मूवमेंट पास दिया जाए। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि दिल्ली के स्कूल, पार्क आदि खाली जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग डिजाइन के साथ रेहड़ी पटरी यहां तक कि साप्ताहिक बाजार भी लगाए जा सकते हैं। हमारे साथ डिजाइनर आर्किटेक्ट की पूरी टीम है जो इस काम में सहयोग कर सकती है और जान व जीविका दोनों को बचाने की तथा सरकारी घोषणा को अमली जामा पहना सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को अब लोगों की समस्याओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिये और इनका हल निकाला जाना चाहिए।