‘दिल्ली में होगा SDRF का गठन, राहत एवं बचाव कार्यों में आयेगी तेजी’

-एनडीआरएफ के साथ उच्चस्तरीय बैठक में बड़ा निर्णय, 1100 जवानों की बटालियन बनाई जाएगी
-फायर विभाग के स्टाफ और सिविल डिफेंस वॉलंटियरों को भी मिलेगी विशेष ट्रेनिंगः सीएम रेखा गुप्ता

एसएस ब्यूरो/नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। दिल्ली सरकार अब अपनी राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) का गठन करेगी। इससे आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित और विशेषज्ञ बल को घटनास्थल पर शीघ्र पहुंचाने, राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा जान-माल के नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी। एसडीआरएफ के गठन के साथ ही दिल्ली सरकार अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों और सिविल डिफेंस वॉलंटियरों को भी विशेष प्रशिक्षण दिलाएगी ताकि आपदा की स्थिति में उपलब्ध स्थानीय मानव संसाधन आवश्यक कौशल और बेहतर समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में योगदान दे सकें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, एनडीआरएफ के डायरेक्टर जनरल (डीजी) पीयूष आनंद, इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) नरेंद्र बुंदेला और विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में एनडीआरएफ अधिकारियों ने दिल्ली में एसडीआरएफ के गठन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर मुख्यमंत्री को जानकारी दी।
उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि दिल्ली में एसडीआरएफ की एक बटालियन का गठन किया जा सकता है। इसमें अधिकतम 1100 जवान होंगे। यह बटालियन राज्य सरकार के अधीन कार्य करेगी और उसके आदेश पर आपदा की स्थिति में घटनास्थल पर तेजी से पहुंचकर प्रभावी राहत व बचाव कार्य कर सकेगी।
NDRF देगा प्रशिक्षण, उपकरणों की खरीद में भी करेगी मददः
एनडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित एसडीआरएफ के जवानों को आवश्यक प्रशिक्षण एनडीआरएफ उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष उपकरण आदि में भी एनडीआरएफ सहायता करेगी। एसडीआरएफ के गठन के बाद दिल्ली सरकार अपने फायर विभाग के स्टाफ और सिविल डिफेंस वॉलंटियरों को भी प्रशिक्षण दिलाएगी ताकि आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ राहत-बचाव कार्य किए जा सकें।