महिला खिलाड़ियों को आर्थिक मजबूती के साथ सुरक्षित माहौल देना हमारा मुख्य उद्देश्य: शिखा कुमार उपाध्यक्ष

-डीडीसीए उपाध्यक्ष ने बताई महिला डीपीएल के आयोजन के पीछे कि वजह

विजय कुमार/ नई दिल्ली, 24 अगस्त।
शुरुआत में दिल्ली महिला प्रीमियर लीग कराना हमारा मकसद रहा था मगर अब यह बढ़कर आगे ऊंचाइयों तक पहुंचे इसी को लेकर हम साल दर साल बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। यह कहना है डीडीसी lए की युवा डायरेक्टर शिखा कुमार का।
दिल्ली महिला प्रीमियर को लेकर एक बातचीत मे उन्होंने बताया कि मेरी मम्मी शशी खन्ना ने जो तत्कालीन डीडीसीए उपाध्यक्ष थी उन्होंने इस लीग की शुरुआत करवाई थी जिसको मैं आगे बढ़ाने का काम कर रही हूं।
मेरा प्रयास है कि लीग तो शुरू हो गई लेकिन इसको कैसे बेहतर किया जाए इसी को ध्यान में रखते मैं जब भी विमेंस मैच देखने आती हूं खिलाड़ियों के पास जरूर जाती हूं और उनसे उनकी परेशानियों के बारे में या कैसे और आगे अच्छा किया जाए जरूर बात करती हूं।
मुझे दिल्ली की महिला खिलाड़ी हमेशा ही कुछ ना कुछ नया करने के लिए प्रेरित करती हैं।
यही नहीं मैं डीडीसीए क्रिकेट लीग लीग मैं भी महिला खिलाड़ियों की परेशानियों को अपने मैनेजमेंट के सामने रखती रहती हूं। मैं अकेली महिला हूं जो लीग कमेटी की मेंबर भी है।
महिला लीग के दौरान खिलाड़ियों को टॉयलेट ड्रेसिंग रूम के रूप में होने वाली परेशानियों को मैं दूर करने का प्रयास करती हूं। यही नहीं कुछ खिलाड़ी तो पैसों को लेकर भी मेरे पास आए हैं कि उनकी पेमेंट नहीं हो रही है मैं कोशिश कर रही हूँ कि उन्हें डीडीसीए ना आना पड़े और उनका काम घर बैठे ही हो जाए इसके लिए मैं व्यक्तिगत तौर पर अपने अकाउंट्स या किसी भी अधिकारी से मिलना होता है तो मिलती हूं। हालांकि सभी का सपोर्ट मुझे पूरी तरह मिलता है। जहां तक मेरे पिता डॉ.सी के खन्ना की बात है तो वह एक बरगद के पेड़ के समान है जिनसे रोज ही कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है।
आज महिला प्रीमियर लीग का तीसर सीजन शुरू हो चुका है। एक समय जहां 70-80 ही खिलाड़ी हुआ करते थे आज उनकी संख्या 700 से 800 तक पहुंच चुकी है और महिलाओं में भी एक दूसरे के प्रति स्पर्धाएं शुरू हो चुकी है। विमेंस टीमों के बीच शामिल होने के लिए सभी महिला खिलाडी खेल के हर क्षेत्र मे चाहे फील्डिंग हो या बल्लेबाजी या फिर गेन्दबाज़ी बहुत मेहनत कर रही है। फिजिकल फिटनेस पर भी बहुत ध्यान द्वारा रही है।
यही नहीं ऑक्शन में भी अब खिलाड़ियों को अच्छे पैसे मिलने लगे हैं। दूसरा महिला खिलाड़ियों की सोच और उनके परिवारों में भी बदलाव का दौर चल निकला है। आज खिलाड़ी स्वयं को विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, मिताली राज, झूलन गोस्वामी, हरमनप्रीत कौर की तरह बनता देखना चाहते हैं। बातचीत अंत मे शिखा कुमार ने कहाकि हमारा प्रयास यही है कि हम महिला खिलाड़ियों को आर्थिक मजबूती के साथ साथ एक अच्छा और सुरक्षित माहौल दें ताकि वह खेल सके और खिल भी सके।