भारत के मुक्केबाज़ों का उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में दमदार प्रदर्शन, 8 स्वर्ण सहित 12 पदकों पर कब्ज़ा

-लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह और प्रीति पवार ने स्वर्णिम अभियान का नेतृत्व किया, भारत ने चेकिया में आठ स्वर्ण पदक जीते

विजय कुमार/ नई दिल्ली, 21 जून।
भारत ने चेकिया में आयोजित 56वें ग्रां प्री उस्ती नाद लाबेम (यूरोपियन बॉक्सिंग गोल्ड टूर्नामेंट) में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 12 पदक अपने नाम किए। भारतीय दल ने आठ स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीतकर इस सत्र के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने सबसे प्रभावशाली अभियानों में से एक दर्ज किया।
भारतीय मुक्केबाज़ों ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। महिला टीम ने पांच मुक्केबाज़ों के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अभियान की अगुवाई की। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), मौजूदा एशियाई चैंपियन प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी (51 किग्रा) और प्रिया (60 किग्रा) ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले सर्वसम्मत निर्णय से जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किए। वहीं परवीन (65 किग्रा) ने रजत पदक जीतकर महिला टीम के शानदार प्रदर्शन को पूर्ण किया।
पुरुष टीम ने भी चार स्वर्ण पदक जीतकर महिला टीम की सफलता की बराबरी की। जादुमणि सिंह मांडेंगबाम (55 किग्रा), सचिन (60 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा) और नरेंद्र (+90 किग्रा) अपने-अपने भार वर्ग में चैंपियन बने।
टीम को बधाई देते हुए बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “56वें ग्रां प्री उस्ती नाद लाबेम में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई। मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच आठ स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह हमारे मुक्केबाज़ों की मेहनत, अनुशासन और जुझारू भावना का प्रमाण है।
मैं विशेष रूप से महिला टीम की सराहना करना चाहता हूं, जिसने मात्र पांच मुक्केबाज़ों के साथ चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर असाधारण प्रदर्शन किया। यह भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए गर्व का क्षण है। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों, स्कॉटलैंड के लिए आपके चयन पर भी हार्दिक बधाई। यह आपके सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हम सभी खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए शुभकामनाएं देते हैं। कड़ी मेहनत करें, फोकस बनाए रखें और आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करें। हमें विश्वास है कि आप आगे भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत का गौरव बढ़ाते रहेंगे।”
लवलीना ने फाइनल में इटली की मेलिसा जेमिनी को 5-0 से हराया, जबकि प्रीति ने फ्रांस की जेयसा मार्सेल को समान अंतर से मात दी। साक्षी ने फ्रांस की मेस्सून बुरेगा को 5-0 से हराया और प्रिया ने मेजबान चेकिया की बारबोरा मैक्सोवा पर एकतरफा जीत दर्ज की।
पुरुष वर्ग में जादुमणि ने इंग्लैंड के अब्दुल बर्टन को 4-1 से पराजित किया। सचिन और अंकुश ने क्रमशः हंगरी के वेरेस रोहलांड और चेक गणराज्य के फ्लोरियन डेनियल को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीते। वहीं नरेंद्र ने हैवीवेट फाइनल में आर्मेनिया के डेविट चालोयान को 3-2 से हराकर स्वर्ण अपने नाम किया।
आदित्य प्रताप यादव (65 किग्रा) और कपिल पोखरिया (90 किग्रा) फाइनल में करीबी मुकाबलों में हारकर रजत पदक विजेता रहे, जबकि सुमित कुंडू (70 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।
यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मुक्केबाज़ी टूर्नामेंटों में से एक यह प्रतियोगिता भारतीय मुक्केबाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय चुनौती साबित हुई। यह प्रतियोगिता 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (ग्लासगो) की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
भारत के पदक विजेता
स्वर्ण पदक:
साक्षी (51 किग्रा-महिला), प्रीति पवार (54 किग्रा-महिला), प्रिया (60 किग्रा-महिला), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा-महिला), जादुमणि सिंह मांडेंगबाम (55 किग्रा), सचिन (60 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), नरेंद्र (+90 किग्रा)
रजत पदक:
परवीन (65 किग्रा-महिला), आदित्य प्रताप यादव (65 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा)
कांस्य पदक:
सुमित कुंडू (70 किग्रा)।