-नगर निगम के भवनों में बैठकर फ्री में अपनी दुकानदारी चलाएंगी एनजीओ
-उत्तरी निगम की स्थायी समिति ने पास किया पहले दो संपत्तियों का प्रस्ताव
हीरेन्द्र सिंह राठौड़/ नई दिल्ली
करोड़ों रूपये की बड़ी संपत्तियों को कौड़ियों के दाम बेचने के आरोपों के बीच घिरे भारतीय जनता पार्टी शासित नगर निगम ने अब चहेतों को अपनी संपत्तियां (बिल्डंगें) मुफ्त में उपलब्ध कराने का फैसला किया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम की बुधवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में इससे संबंधित एक प्रस्ताव पास कर दिया गया। बैठक के ऐजेंडा के आइटम संख्या 66 के मुताबिक फिलहाल नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े भवनों को अब स्वयं सेवी संगठनों (एनजीओ) के हवाले किया जायेगा।
प्रस्ताव के मुताबिक नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के जो भी भवन खाली पड़े हैं या फिर जिन बिल्डिगों में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं, उन्हें एनजीओ को इस तरह की सेवाएं शुरू करने के लिए मुफ्त में दिया जायेगा। ताकि लोग यहां आकर अपना इलाज करा सकें। फिलहाल कुतुबगढ़ में बनवाए गए औषधालय के नये भवन और झंडेवालान स्थित चेस्ट क्लीनिक के भवन को निजी संगठनों को बिना किसी शुल्क के दिया जायेगा। इसके पश्चात कुछ और भवनों को भी इसी तरह से अपने चहेतों को निःशुल्क दिया जा सकेगा।
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पास किये गये प्रस्ताव के मुताबिक पहली बार में निजी संगठन को यह संपत्तियां 15 वर्ष के लिये दी जाएंगी और इसके बाद 5-5 साल के लिए लाइसेंस की अवधि को बढ़ाया जा सकेगा। खास बात है कि निजी संगठनों को नगर निगम से भवन लेने के बाद उसके लिए कोई संपत्ति कर भी नहीं चुकाना होगा। इतनी सुविधाओं के बाद भी इन स्वयं सेवी संगठनों को अपनी दुकानदारी चलाने की पूरी आजादी रहेगी।
मुफ्त की बिल्डिंग, कोई संपत्ति कर नहीं, फिर भी कर सकेंगे वसूली
बुधवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति में पास किये गये प्रस्ताव संख्या 66 के मुताबिक मरीजों के पंजीकरण और दूसरी सुविधाएं देने के लिए यदि जरूरी हुआ तो यह एनजीओ ‘नॉमिनल चार्ज’ की वसूली कर सकेंगे। फिर भी उन्हें नगर निगम को किसी तरह का भुगतान नहीं करना होगा। उन्हें केवल बीपीएल कार्ड धारकों को अपने पास उपलब्ध बीमारियों के इलाज की व्यवस्था निःशुल्क देनी होगी।
बचकाना जवाबः ‘मरीज को लगे कि वह इलाज कराने आया है, इसलिए दे रहे ‘नॉमिनल चार्ज’ वसूलने की छूटः जोगीराम
उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के चेयरमैन जोगीराम जैन ने कहा कि ‘हम एनजीओ को नॉमिनल चार्ज वसूलने की छूट इसलिए दे रहे हैं कि मरीजों को लगे कि वह इलाज कराने आया है।’ जब उनसे पूछा गया कि केंद्र सरकार के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान व राम मनोहर लोहिया अस्पताल व दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में मरीजों से पर्चा बनवाने या रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। फिर फ्री की बिल्डिंग और हाउस टैक्स से छूट देने के बाद नगर निगम निजी संगठनों को मरीजों से पंजीकरण या अन्य चार्ज वसूलने की छूट कैसे दे सकता है? क्या एम्स, आरएमएल या अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नहीं लगता कि वह इलाज कराने आये हैं? इस बात पर बीजेपी नेता और स्थायी समिति चेयरमैन ने चुप्पी साध ली।