–धार्मिक समीकरण के आधार पर तय हुई दंगों की साजिश
-स्पेशल सेल की आरोप पत्र में हुआ दंगों की साजिश का खुलासा
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली
‘मौत के सौदागरों’ ने दंगों के लिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली को सोच समझकर चुना था। फरवरी महीने में भड़के साम्प्रदायिक दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अपने आरोप पत्र में बड़ी साजिश का खुलासा किया है। कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र में पुलिस ने दावा किया है कि एक बड़ी साजिश के तहत उत्तर-पूर्वी दिल्ली को दंगों के लिए चुना गया था। पुलिस ने आरोपपत्र में कहा है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अलग तरह की आर्थिक, सामाजिक व जनसंख्या के समीकरणों के आधार पर दंगों के लिए इस स्थान को चुना गया था। यहां दंगों के लिए समुदाय विशेष के लिए भीड़ को जुटाना और उन्हें भड़काकर दंगा कराना आसान था।
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कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत में पेश आरोपपत्र में कहा गया है कि जहां से दंगों की शुरुआत हुई वह अतिसंवेदनशील इलाका है। जबकि दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली में यह काम दंगों की साजिश रचने वालों के लिए आसान नहीं होता। यहां दंगे फैलाने का मुख्य उद्देश्य यह भी था कि समुदाय विशेष को भड़का कर दंगे शुरु करवा दिए जाएं और खुद इसकी साजिश का नेतृत्व कर रहे नेता घर पर टीवी पर दिल्ली को जलता हुआ देखें। जबकि इन दंगों का नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ा जोकि रोज कमाते व रोज खाते हैं।
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उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में सबसे ज्यादा जान-माल का नुकसान निचले तबके को हुआ है। 16 सितंबर को अदालत में दाखिल आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि बहुत पहले ही यह तय कर लिया गया था कि धरना स्थल कहां-कहां बनाए जाएं। ताकि समय आने पर इन जगहों से दूसरे समुदाय के रास्ते को बंद किया जा सके। क्योंकि यहां मिले-जुले सम्प्रदाय के लोग रहते हैं। दंगों की साजिश के पीछे के लोगों की यही सोच थी कि यहीं से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
डिजिटल मीडिया पुलिस के निशाने पर
दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र में कहा है कि डिजिटल मीडिया इस साजिश के आकाओं के लिए कारगर रही जो कि दंगों की चिंगारी लगाकर अपने घरों में बैठ गए और घर से टीवी पर दंगों का रक्तरंजित लाइव देखते रहे। इनमें से कुछ साजिशकर्ता तो दिल्ली से बाहर भी चले गए ताकि सीधे तौर पर उनका नाम ना आए। आपस में ही मारकाट करने वाले लोग आरोपी बन जाएं। इन साजिशकर्ताओं ने महिलाओं को अपनी ढाल बनाया। उन्हीं से चक्का जाम कराया। यहां तक कि मासूम बच्चों को भी अपने हाथ का खिलौना बनाया। जामिया, शाहीन बाग व जाफराबाद सभी जगह एक जैसी प्रक्रिया को अपनाया गया। आरोपपत्र में कहा गया है कि जामिया व शाहीन बाग में दिसंबर 2019 में दंगों के बाद साजिशकर्ता जान चुके थे कि यहां से दंगें भड़काना संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने दिसंबर से ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों को अंजाम देने की तैयारी शुरु कर दी थी।
निजी व सार्वजनिक संपति को हुआ नुकसान
आरोपपत्र के मुताबिक 23 फरवरी से 26 फरवरी के बीच हुए दंगों के कारण निजी जान-माल की संपत्ति का ही नुकसान नहीं हुआ, बल्कि इस दौरान आगजनी के कारण मेट्रो सेवा को रोकना पड़ा, जबकि डीटीसी की बसों को जला दिया गया। हमलों में कई डीटीसी कर्मचारी भी घायल हो गए थे। यही नहीं दंगे के कारण कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा था और सेवाओं में व्यवधान उत्पन्ंन हुआ था। जिससे मेट्रो को भी राजस्व की भारी हानि का सामना करना पड़ा था।
रोकनी पड़ी थी दिल्ली मेट्रो सेवा
आरोपपत्र में कहा गया है कि दंगे के दौरान 25 फरवरी को मेट्रो ने 174 और दो डाउन ट्रिप को मौजपुर-शिव विहार के बीच रद्द कर दिया था। मौजपुर-वेलकम स्टेशन के बीच 362 आंशिक राउंड ट्रिप और शिव विहार-वेलकम सेक्शन के बीच मेट्रो के 23 फेरे रद्द रहे थे। मट्रो का संचालन बाधित होने से काफी नुकसान हुआ था। आरोपपत्र में कहा गया है कि यमुना विहार और करावल नगर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार इलाके में गैर-वाणिज्यिक संपत्तियों को नुकसान के 688 मामले व आवासीय संपत्तियों को नुकसान के 442 मामले सामने आए थे। जबकि सीलमपुर और शाहदरा उपखंडों में हुए नुकसान का आंकलन अभी चल रहा है। वहीं, पीड़ित परिवारों को अब तक 12 करोड़ 22 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान प्रशासन द्वारा किया जा चुका है।