-घटकर आधी के करीब रह गई है जल संयत्रों में पानी उत्पादन की क्षमता
-पानी आपूर्ति में कमी, 674 फीट से घट कर 670 फीट हुआ यमुना का जल स्तर
-सेंट्रल दिल्ली, साउथ दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली और वेस्ट दिल्ली में जलापूर्ति प्रभावित
एसएस ब्यूरो/ नई दिल्ली
दिल्ली में गर्मी का सीजन सही ढंग से शुरू भी नहीं हुआ है लेकिन पीने के पानी के लिए हाहाकार शुरू हो गया है। हरियाणा से दिल्ली को कम मात्रा में .पानी मिलने और गंदे पानी की सप्लाई की वजह से यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़कर 6.7 पीपीएम हो गई है। इसकी वजह से दिल्ली की तीन बड़े जल संयत्रों को पानी की उत्पादन क्षमता घटानी पड़ी है। वजीराबाद संयत्र में पानी उत्पादन की क्षमता 135 एमजीडी से घटकर 82 एमजीडी हो गई है। वहीं चंद्रावल संयत्र में भी पानी उत्पादन की क्षमता 92 से घटकर 71 एमजीडी और ओखला संयत्र में 21 से घटकर 10 एमजीडी रह गई है।
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दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने हरियाणा द्वारा यमुना में अमोनिया युक्त गंदा पानी छोड़ने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा द्वारा यमुना में छोड़े जा रहे पानी में अमोनिया का स्तर 7.6 पीपीएम है। एक तरफ हरियाणा अमोनिया युक्त पानी दे रहा है और दूसरी तरफ यमुना के जल स्तर को भी कम कर दिया है। इससे यमुना का 674 फीट से घट कर 670 फीट हो गया है। इस वजह से हमारे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 100 फीसद क्षमता पर नहीं चल पा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा से गंदा और कम पानी मिलने की वजह से सेंट्रल दिल्ली, साउथ दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली और वेस्ट दिल्ली के कई इलाकों में जल आपूर्ति प्रभावित रहेगी। हरियाणा आपराधिक लापरवाही और दिल्ली के दो करोड़ लोगों के जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार दिल्ली वालों की जिंदगी से खेलना बंद करे और कानूनी तौर पर तय साफ पानी मुहैया कराए।
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दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि कोरोना रुपी राक्षस देश की राजधानी और पूरे हिंदुस्तान में अपना सर फिर से उठा रहा है। कोरोना का प्रकोप देश की राजधानी क्षेत्र में फैलता जा रहा है। इसी के साथ, नवरात्र और रमजान दोनों त्योहार भी शुरू हो गए हैं। ऐसे समय में जब रमजान भी है, नवरात्र भी है और कोरोना महामारी अपने चरम पर है, उस स्थिति में पानी को लेकर एक बेहद चिंताजनक स्थिति हरियाणा की वजह से उत्पन्न होती नजर आ रही है। हरियाणा द्वारा दिल्ली भेजे जा रहे पानी में बहुत भारी मात्रा में अमोनिया यानि गंदगी और औद्योगिक कचरा आ रहा है, जो शोधित करने योग्य नहीं है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी उस गंदे पानी को शोधित नहीं कर सकते हैं। उस पानी को बिना शोषित किए हम अपने दिल्ली वालों को नहीं दे सकते हैं।