North DMC के 2 हजार डॉक्टर्स ने दी सामूहिक VRS की धमकी

-सेलरी नहीं मिलने से परेशान हैं 5 बड़े हॉस्पिटल, हेल्थ सेंटर्स व डिस्पेंसरीज के कोरोना वॉरियर्स
-नहीं ध्यान दे रहे निगम अधिकारी, अब उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर मांगी इजाजत

टीम एटूजैड/ नई दिल्ली
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हालात और ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं। कस्तूरबा और हिंदूराव अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर्स के बाद अब पूरे नगर निगम के डॉक्टर्स ने सामूहिम वीआरएस लेने की इजाजत मांगी है। उपराज्यपाल अनिल बैजल को लिखे पत्र में म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा है कि उन्हें सभी बकाया भुगतानों के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इजाजत दी जाए।

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म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन डॉक्टर्स एसोसिएशन (एमसीडीए) ने कहा है कि नगर निगम अपने डॉक्टर्स को पिछले तीन महीनों से वेतन के साथ सेवा संबंधी दूसरी सुविधाएं मुहैया कराने में नाकाम साबित रहा है। केंद्र सरकार ने डॉक्टर्स को कोराना फ्रंटलाइन वॉरियर्स का तमगा दिया है। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इस ओर बिलकुल ध्यान नहीं दे रहे। एमसीडीए ने कस्तूरबा और हिंदूराव अस्पतालों की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की मांगों का समर्थन किया है।

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बता दें कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के द्वारा 5 बड़े अस्पतालों, 17 पॉलिक्लीनिक, 65 मेटरनिटी हेल्थ सेंटर्स, 7 चेस्ट एंड टीबी सेंटर्स और 21 डिस्पेंसरीज का संचालन किया जा रहा है। इनमें करीब दो हजार डॉक्टर्स कार्यरत हैं। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इन सभी दो हजार डॉक्टर्स को बीते मार्च, अप्रैल और मई महीने की सेलरी नहीं दी है। जिसकी वजह से डॉक्टर्स की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।

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डॉक्टर्स एसोसिएशन ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है नगर निगम के अधिकारी स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अतः इन अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य सेवाओं को राज्य या केंद्र सरकार को सोंप दिया जाना चाहिए।
निगम के पास पैसा, लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी सेलरी
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हालात खराब करने में निगम के आला अधिकारियों की बड़ी भूमिका रही है। निगम के पास धनराशि होते हुए भी डॉक्टर्स की सेलरी को रोककर रखा गया है। पिछले महीने में भी कुछ इसी तरह के हालात बने थे। तब एमसीडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सेलरी दिलाने की गुहार लगाई थी। इसे तीन दिन बाद ही निगम अधिकारियों ने 20 मई को फरवरी महीने की सेलरी जारी कर दी थी। खास बात है कि उस समय निगम के पास दिल्ली सरकार या किसी अन्य स्रोत से कोई पैसा नहीं आया था। इसके बाद अधिकारियों ने एक बार फिर से डॉक्टर्स की सेलरी रोक दी है।
निगम के पास अब भी पैसा, लेकिन फजीहत करा रहे अधिकारी
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आला अधिकारी लगातार निगम की फजीहत कराने में जुटे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में निगम अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है कि निगम के पास अभी 10 करोड़ रूपये जमा हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने डॉक्टर्स की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। बता दें कि रेजीडेंट डॉक्टर्स के मसले पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें तुरंत सेलरी का भुगतान करने का आदेश दिया है।
दागी लोगों को मिले बड़े ओहदे
उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। निगम में बड़े पदों पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी अधिकारी बैठे हैं। एसका एक उदाहरण खुद म्युनिसिपल हेल्थ ऑफीसर (एमएचओ) की सीट है। निगम, विजीलेंस और कोर्ट की ओर से कई मुद्दों पर सजा या जांच का सामना कर रहे अधिकारी बड़े पदों पर बैठे हैं। ऐसे में निगम की हालत ठीक होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। ऐसे अधिकारियों की वजह से निगम लागातार नुकसान उठा रहा है।
बीजेपी की छवि को झटका
दिल्ली के तीनों निगमों में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता है। अधिकारियों ने समय रहते राजस्व जुटाने के उपाय ही नहीं किए। डेपुटेशन पर आए कुछ अधिकारी ही निगम को चला रहे हैं। यह अधिकारी एक से ज्यादा पद होने के बावजूद और ज्यादा पद हथियाने में जुटे हैं। जबकि इन्हीं अधिकारियों के पास सबसे ज्यादा राजस्व जुटाने वाला आरपी सेल और लाइसेंसिंग जैसे विभाग हैं। लेकिन यह अधिकारी पदों पर कब्जा करके हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पब्लिसिटी एंड इनफॉरमेशन एवं आयुष विभाग इसके ताजा उदाहरण हैं। जबकि एमएचओ का पद तो लंबे समय से चर्चा में है। यह अधिकारी अपनी मनमानी चलाने के लिए बीजेपी की भद्द पिटवाने में लगे हैं।